Dantewada Naxalites Surrender | लाल आतंक को बड़ा झटका! छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों का सरेंडर, 36 इनामी नक्सलियों पर था करोड़ों का इनाम

By रेनू तिवारी | Jan 10, 2026

छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिला कैडर भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन 63 नक्सलियों में से 36 नक्सली ऐसे थे, जिन पर सरकार ने कुल 1.19 करोड़ रुपये का सामूहिक इनाम घोषित कर रखा था। इन नक्सलियों ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपने हथियार डाले।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास, परिवर्तन और नए जीवन की ओर सार्थक कदम है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में जारी नक्सल विरोधी मोर्चे पर सुरक्षाबलों को शुक्रवार को महत्वपूर्ण सफलता मिली जब पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित होकर 36 इनामी समेत 63 माओवादी समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में 18 महिलाएं हैं।

 

अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, अबूझमाड़ और ओडिशा में सक्रिय थे। उनमें 36 माओवादियों पर एक करोड़ 19 लाख 50 हजार का इनाम घोषित था। अधिकारियों के अनुसार माओवादियों के आत्मसमर्पण करने के समय केंद्रीय रिवर्ज पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी, दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में डिविजनल कमेटी सदस्य और कालाहांडी एरिया कमेटी सचिव पाकलू उर्फ रैनू (45), पश्विम बस्तर डिवीजन छात्र संगठन अध्यक्ष मोहन उर्फ संजय (32), भैरमगढ़ एरिया कमेटी सचिव सुमित्रा उर्फ द्रोपती (30), मिलिट्री कंपनी नंबर 10 की सदस्य हुंगी उर्फ अंकिता (28), कंपनी नंबर एक सदस्य सुखराम ताती (20), कंपनी नंबर सात का सदस्य पांडू मड़काम (19) और सोमडू कड़ती उर्फ रिंकू (21) शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी नक्सलियों पर आठ-आठ लाख रुपए का इनाम घोषित था।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सात अन्य नक्सलियों पर पांच-पांच लाख रुपये, आठ नक्सलियों पर दो-दो लाख रुपये, 11 नक्सलियों पर एक-एक लाख रुपये और तीन नक्सलियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। अधिकारियों ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी तथा सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माओवादियों के आत्मसमर्पण को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, शांति और विकास की दिशा में एक और सशक्त कदम, माओवाद के अंत से लिखा जाएगा बस्तर का स्वर्णिम कल। आज बस्तर के दंतेवाड़ा में पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों, जिसमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं, ने हिंसा और भटकाव का मार्ग छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास, परिवर्तन और नए जीवन की ओर सार्थक कदम है।

साय ने लिखा है, यह सफलता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से यह सिद्ध हुआ है कि बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं। छत्तीसगढ़ की सरकार की सटीक नीति और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण आज नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है।

माओवादियों का प्रभावी विघटन हो चुका है और दंतेवाड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी तेज़ी से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। बस्तर में अब शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं। इससे पहले सात जनवरी को, सुकमा जिले में 26 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। 2025 में राज्य में 1500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था।

बस्तर में आत्मसमर्पण की लहर

यह इस साल बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों का दूसरा बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है।

दंतेवाड़ा (शुक्रवार): 63 नक्सलियों का आत्मसमर्पण (1.19 करोड़ का इनाम)।

सुकमा (दो दिन पहले): 26 नक्सलियों ने हथियार छोड़े थे।

क्यों बदल रहा है नक्सलियों का मन?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शासन की पुनर्वास नीति और 'लोन वर्राटू' (घर वापस आइए) जैसे अभियानों से प्रभावित होकर नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। अंदरूनी इलाकों में खुलते नए सुरक्षा कैंपों और विकास कार्यों ने नक्सलियों के आधार को कमजोर कर दिया है। 

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