By एकता | Jun 08, 2026
अक्सर माता-पिता की यह शिकायत होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई के नाम पर रोने लगता है, चिड़चिड़ा हो जाता है या तरह-तरह के बहाने बनाने लगता है। कई बार पेरेंट्स गुस्से में आकर बच्चे पर हाथ भी उठा देते हैं, लेकिन मारना-डांटना इसका सही इलाज नहीं है। माता-पिता को सबसे पहले यह समझना होगा कि बच्चा पढ़ाई से डर क्यों रहा है। हो सकता है कि उसे कोई सब्जेक्ट बहुत मुश्किल लगता हो, स्कूल में कोई परेशानी हो या फिर उस पर पढ़ाई का दबाव बहुत ज्यादा हो। बिना वजह जाने बच्चे को डांटने से समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है।
लगातार न पढ़ाएं, छोटे-छोटे ब्रेक दें: बच्चे को घंटों एक साथ बैठने के लिए मजबूर न करें। उसे 15-20 मिनट ही पढ़ाएं और फिर थोड़ा सा ब्रेक दें। जब बच्चा अपना छोटा सा काम भी पूरा कर ले, तो उसकी तारीफ जरूर करें ताकि उसका हौसला बढ़े।
दूसरों से तुलना बिल्कुल न करें: कभी भी अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे बच्चे से न करें। इससे उसके मन में हीनभावना आ जाती है। हर बच्चे के सीखने की रफ्तार अलग होती है, इसलिए उसकी खुद की तरक्की की तारीफ करें।
प्यार से बात संभालें: अगर बच्चा पढ़ते समय रोने लगे, तो उसे गले लगाएं और शांत करें। उसकी परेशानी को ध्यान से सुनें ताकि उसे भरोसा हो सके कि आप उसके साथ हैं। जब बच्चा सुरक्षित महसूस करेगा, तो वह अपनी बात खुलकर कह पाएगा।
अगर इन सब तरीकों के बाद भी बच्चा लगातार पढ़ाई से डरता है, बहुत ज्यादा तनाव में रहता है या उसे चीजें सीखने में बहुत ज्यादा दिक्कत आ रही है, तो बिना देर किए किसी चाइल्ड काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेनी चाहिए।