By अभिनय आकाश | Jul 07, 2025
ब्रिक्स देशों के साझा घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की धारा 34 में कड़े शब्दों में निंदा की गई है। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। घोषणापत्र में इस हमले का जिक्र करते हुए इसे ‘आतंकवाद की क्रूर और अमानवीय कार्रवाई’ बताया गया है। भारत के लिए ये बड़ी कूटनीतिक सफलता है क्योंकि इस मंच पर चीन भी मौजूद था। हालांकि पूरे घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर कहीं नहीं है लेकिन सीमा-पार आतंकवादियों की आवाजाही और आतंक की सुरक्षित पनाहगार और आतंकियों को आर्थिक सहयोग जैसे शब्दों का जिक्र जरूर किया गया है। चीन की मौजूदगी में पहलगाम हमले पर इस तरह का घोषणा पत्र महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है क्योंकि इससे पहले चीन ने कभी भी इस मुद्दे पर अपना सकारात्मक रुख नहीं दिखाया था।
माओ ने यह भी कहा कि भारत-चीन संबंध सुधार और विकास के महत्वपूर्ण दौर में हैं और बीजिंग नयी दिल्ली के साथ द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देना चाहेगा। माओ ने उन खबरों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देने से भी इनकार कर दिया, जिनमें कहा गया था कि चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के बारे में संदेह फैलाने के लिए अपने दूतावासों को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा, आपने जो उल्लेख किया है, मैं उससे अवगत नहीं हूं। पिछले सप्ताह दिल्ली में एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जनरल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान मुखौटा है, तथा चीन अपने सदाबहार मित्र को हरसंभव सहायता दे रहा है, एवं तुर्किये भी इस्लामाबाद को सैन्य साजो सामान की आपूर्ति करके एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि 7-10 मई के संघर्ष के दौरान भारत वास्तव में कम से कम तीन शत्रुओं से निपट रहा था।