By नीरज कुमार दुबे | Feb 09, 2023
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में हमने ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त श्री डीएस त्रिपाठी से जानना चाहा कि चीन के जासूसी बैलूनों का अमेरिका और ताइवान पहुँचना क्या दर्शाता है। हमने यह भी जानना चाहा कि बताया जा रहा है कि चीनी गुब्बारों ने भारत की भी जासूसी की इसलिए भारत को चीन की ओर से ऐसी जासूसी के प्रति कैसे सतर्क रहना चाहिए। इस पर उन्होंने कहा कि गुब्बारे से जासूसी कोई पहली बार नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट अत्यधिक ऊँचाई पर होने के कारण उतनी साफ तस्वीरें नहीं भेज सकते जितनी इस जासूसी गुब्बारे से ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि चीनी जासूसी गुब्बारे ने अमेरिका के एयर डिफेंस को भेद कर दिखा दिया है कि वह अमेरिका के कितने करीब पहुँच सकता है। उन्होंने कहा कि आज गुब्बारे में जासूसी उपकरण हैं कल को इसमें विस्फोटक भी भेजे जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने कहा है कि चीन की पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) वायु सेना द्वारा संचालित इन निगरानी यान को पांच महाद्वीपों में देखा गया है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी के हवाले से कहा गया है, ‘‘ये गुब्बारे पीआरसी (चीनी जनवादी गणराज्य) के गुब्बारों के बेड़े का हिस्सा हैं, जिन्हें निगरानी अभियान चलाने के लिए विकसित किया गया है और इन्होंने अन्य देशों की संप्रभुता का उल्लंघन किया है।’’