By अभिनय आकाश | May 12, 2026
नई दिल्ली के गलियारों से लेकर टोक्यो के सत्ता केंद्रों तक एक ऐसी हलचल शुरू हुई है जिसने बीजिंग की रातों की नींद उड़ा दी है। भारत और जापान ने आधिकारिक तौर पर एक ऐसे समझौते पर मुर लगा दी है जो ना केवल इन दो देशों का भविष्य बदलेगा बल्कि पूरे इंडोपेसिफिक क्षेत्र में शक्ति के संतुलन को नई दिशा देगा। भारत जापान इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग के दूसरे दौरे में वह बड़ा फैसला लिया गया जिसकी धमक आने वाले कई दशकों तक महसूस की जाएगी। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री और जापान के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच हुई इस बैठक का सीधा लक्ष्य है ग्लोबल सप्लाई चेन से चीन के वर्चस्व को उखाड़ फेंकना। दोनों देशों ने तय किया कि वे रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में अपने सहयोग को उस स्तर पर ले जाएंगे जहां कोई बाहरी ताकत या भू राजनीतिक तनाव भारत की प्रगति की रफ्तार को रोक ना सके। यह समझौता मुख्य रूप से उन सेक्टर्स पर केंद्रित है जिन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीड माना जाता है।
इन प्रशांत क्षेत्र को खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित रखने के लिए भारत का मजबूत होना बहुत जरूरी है और जापान इस हकीकत को बखूबी समझता है। यानी यह डायलॉग सिर्फ कागजी कारवाही नहीं है बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब दुनिया की फैक्ट्री बनने के लिए तैयार है और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए जापान अपनी फैक्ट्रियों और तकनीक को भारत में शिफ्ट करने के लिए बड़े कदम उठाने जा रहा है। जिससे भारत की औद्योगिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। खैर राजशित में लिए गए इस फैसले ने साफ कर दिया कि कि आने वाला समय भारत का है।