Balochistan में पड़ गई चीन को लात, तगड़ी फिल्डिंग लगा घुस गया अमेरिका

By अभिनय आकाश | May 05, 2026

बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर जबरदस्त बवाल मचा हुआ और इस बार यह मामला सिर्फ स्थानीय शांति तक सीमित नहीं बल्कि इसमें चीन, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच चल रहा खेल खुलकर सामने आ गया। बलूचिस्तान पहले से अस्थिर रहा है, लेकिन अब यहां की शांति और भी विस्फोटक होती जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने अपने खनन क्षेत्र में अमेरिका को बड़ी हिस्सेदारी देने का फैसला कर लिया है। यानी साफ अब वो चीन के साथ-साथ अमेरिका को भी मैदान में उतार कर खेल बदलना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस नई डील की शुरुआत एक बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। पिछले साल पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को रत्नों से भरा एक खास तोहफा दिया था। हालांकि इसकी तस्वीर भी सोशल मीडिया पर बड़ी वायरल हुई। यह सिर्फ एक गिफ्ट नहीं था बल्कि एक संकेत था कि बलूचिस्तान की जमीन में छुपे सोने और तांबे के भंडार से अमेरिका अरबों डॉलर कमा सकता है। 

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इसके बाद करीब 1.3 बिलियन डॉलर के निवेश की राह खुली। हालांकि आपको बता दें बलूचिस्तान में चीन लंबे वक्त से कई बड़े प्रोजेक्ट चला रहा है। कई सालों तक पाकिस्तान और चीन ने मिलकर इस इलाके में विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट चलाए। चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए चीन ने यहां भारी निवेश भी किया और इसे अपने वैश्विक नेटवर्क का अहम हिस्सा बनाने की कोशिश की। लेकिन चीन ने जो गलती की थी शायद अब अमेरिका भी वही गलती करने जा रहा है। चीन बलूचिस्तान में तो घुस गया लेकिन बलोच लोगों से ना तो उसका प्रोजेक्ट सुरक्षित रहा और ना ही उसके इंजीनियर्स। लंबे समय से वहां की बलोच लिबरेशन आर्मी चीन के इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है और इस विरोध में कई चीनी इंजीनियर्स और पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। और वहीं अमेरिका से जिस डील को पाकिस्तान गेम चेंजर मान रहा था अब वो भी हिंसा की आग में फंस चुका है। क्योंकि पिछले एक साल में बलोच लिबरेशन आर्मी ने वहां पर कई बड़े हमले किए हैं। हाल ही में बीएलए ने 12 इलाकों में 18 जगहों को निशाना बनाया था। जिसमें 58 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। ये हमले खासतौर पर उन रास्तों पर हुए जो रिकोडक खदान की तरफ जाते हैं। यानी सीधे-सीधे पाकिस्तान के इस बड़े प्रोजेक्ट को चुनौती। 

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अब हालात यह है कि जिन विदेशी ताकतों को पाकिस्तान यहां लाकर ताकत दिखाना चाहता था। वही अब डरने लगी हैं। बैरिक गोल्ड जैसी कंपनियों ने भी सुरक्षा हालात खराब होने के चलते अपने प्रोजेक्ट धीमे कर दिए हैं। इस पूरे विवाद का एक और खतरनाक पहलू है बदलता हुआ विद्रोह। पहले यह आंदोलन सीमित था लेकिन अब पढ़े लिखे बलोच युवा भी इसमें शामिल हो रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनकी जमीन से संसाधन निकालकर बाहरी ताकतों को बेचा जा रहा है। ऊपर से मानवाधिकार उल्लंघन और जबरन गायब किए गए लोगों के आरोप इस आग में और घी डाल रहे हैं। कुल मिलाकर पहले तो पाकिस्तान ने चीन को झटका दिया। अमेरिका को एक तरह से बलूचिस्तान में घुसाने का फैसला लिया और अब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के कई हमलों ने एक तरह से चीन और अमेरिका की गर्दन यहां पर फंसा दी है। कुल मिलाकर बलूचिस्तान अब सिर्फ एक खनिज क्षेत्र नहीं रहा। यह एक जंग का मैदान बन चुका है। चीन, अमेरिका और पाकिस्तान तीनों अपनी जगह अपनी चाल चल रहे हैं।

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