By Ankit Jaiswal | Aug 06, 2026
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ऐसे दावों को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए डाबर इंडिया के कई उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया है। नियामक का कहना है कि इन दावों से उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और यह मौजूदा नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
बता दें कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा है कि कुछ उत्पादों पर बिना अनुमति के जैविक होने का दावा किया गया, जिससे उपभोक्ताओं को यह संदेश मिल सकता है कि इन उत्पादों को नियामक की विशेष स्वीकृति प्राप्त है। इसके अलावा कुछ अन्य दावे भी खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन तथा दावे विनियम, 2018 के अनुरूप नहीं पाए गए हैं।
नियामक ने डाबर इंडिया को तत्काल प्रभाव से संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बाजार में मौजूद ऐसे उत्पादों को 15 दिनों के भीतर वापस मंगाने और नियमों के पालन की विस्तृत रिपोर्ट जमा करने को भी कहा गया है। गौरतलब है कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और उन पर लिखे जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता रहता है, ताकि उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी मिल सके।
उधर, डाबर इंडिया ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष भी रखा है। कंपनी का कहना है कि उसके उत्पादों के पैकेट पर लिखी गई जानकारियां वर्तमान कानूनी और नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप हैं तथा लंबे समय से उद्योग में अपनाई जा रही परंपराओं के अनुसार तैयार की गई हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने कभी भी उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावे नहीं किए और वह अपने उत्पादों की शुद्धता तथा गुणवत्ता पर पूरी तरह कायम है।
हालांकि डाबर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने नियामक की आपत्तियों के बाद अपने उत्पादों के पैकेट, विज्ञापनों और अपनी वेबसाइट से "100 प्रतिशत" जैसे दावों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी के अनुसार, कई उत्पादों के पैकेट पहले ही बदले जा चुके हैं, जबकि बाकी उत्पादों में यह प्रक्रिया जारी है। डाबर ने कहा कि वह इस मामले में नियामक के साथ लगातार संवाद कर रही है और सभी आवश्यक नियमों का पालन करते हुए इस विषय का समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावों की पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं।