China ने तो पाकिस्तान के खात्मे का ही प्लान बना दिया! ग्वादर रेललाइन होगी ताबूत में आखिरी कील

By अभिनय आकाश | Dec 13, 2025

पाकिस्तान की बर्बादी में अब ताबूत की आखिरी कील क्या लगने ही वाली है? यह आखिरी कील भारत या अफगानिस्तान नहीं खुद पाकिस्तान ठोकेगापाकिस्तान पर भीख में कुछ रुपए फेंक कर चीन पाकिस्तान के हर मिनरल का दोहन कर रहा हैपाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान की फौज जिनपिंग की कठपुतली बनकर नाच रहे हैं और खैरात में भ्रष्टाचार के कुछ पैसे पाकर मगन हैलेकिन बलोचों और पश्तनु को यह कबूल नहीं है कि उनके हक का संसाधन कोई दूसरा देश ले जाए और उनको एक आना भी नसीब ना हो। उनको कोई नौकरी ना मिले। उनका कोई फायदा ना हो। उनके यहां कोई भी प्रोजेक्ट ना पहुंचे। पाकिस्तान से मिनरल लूटने के लिए चीन बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बना देता है। लेकिन लोकल जो बलूच हैं उनको एक ढेला नहीं मिलता। पाकिस्तान की चालबाजी बलूच और पश्तून समझ चुके हैं और तभी उसका अंजाम पाकिस्तान गृह युद्ध के तौर पर झेल भी रहा है। लेकिन पाकिस्तान ने अब फिर से अपनी जमीन का सौदा कर दिया है। वो भी मुफ्त में।

दरअसल ग्वादर के एंड रेल मेन लाइन। वैसे तो ये दोनों परियोजनाएं चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर यानी कि सीपक का पार्ट हैं, हिस्सा हैं। दिसंबर 2025 तक इनका कोई भी बड़ा काम शुरू नहीं हुआ है। अब समझते हैं आपको मेन लाइन वन क्या है? एमएल वन भी इसे कहते हैं। दरअसल ये कराची से पेशावर तक करीब 1700 कि.मी. की एक ऐसी परियोजना है जिसमें ट्रैक को डबल करना है। स्पीड बढ़ानी है रेलवे ट्रैक्स की। पोलों का निर्माण होना है और सिग्नलिंग सिस्टम इसमें शामिल है। ठीक इसी तरह से है ग्वादर केएसए रेल कॉरिडोर। हालांकि सीधी रेल लाइन नहीं है क्योंकि ग्वादर और सऊदी अरब के बीच समंदर पड़ता है। बल्कि गवादर पोर्ट को एमएल वन और राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़कर खाड़ी व्यापार के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाने की पूरी योजना है।

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ये पाकिस्तान के गवादर पोर्ट को सऊदी अरब के साथ जोड़ने के मकसद से तैयार की गई है। यानी कि पूरा फायदा जो है वो गल्फ तक पहुंचे। यह कोशिश की जा रही है। तनावग्रस्त हजारों किलोमीटर रेलवे की सुरक्षा पाकिस्तान में कोई कर ही नहीं सकता है। आपने देखा होगा जब मन करता है तब बलोच कभी पटरी उखाड़ देते हैं, कभी बॉम्ब सेट कर देते हैं और जब उनका मन होता है सुबह उठकर वो जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लेते हैं। इससे लागत और सुरक्षा जोखिम पाकिस्तान में बहुत बढ़ जाएगा। दूसरी तरफ है बड़े विदेशी लोन। जो खैरात में पाकिस्तान को मिलते जरूर हैं। 

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