China के हाथ लगी अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी, असली खेल अब शुरू!

By अभिनय आकाश | Mar 08, 2026

दुनिया का ध्यान ईरान और अमेरिका के तनाव पर है। लेकिन इस संघर्ष के पीछे एक ऐसा खिलाड़ी है जो बिना एक भी गोली चलाए इस जंग को जीत रहा है। वो खिलाड़ी है चीन। जानकारों का मानना है कि संघर्ष में अमेरिका को एक ऐसा गहरा जख्म मिला है जिसकी भरपाई करने में शायद उसे कई दशक लग जाए। चीन ने वो कर दिखाया जो रूस यूक्रेन युद्ध में भी मुमकिन नहीं हो पाया था। चीन की निगाहें अब जमीन पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष से अमेरिका के हर कदम को ट्रैक कर रही हैं। अमेरिकी सेना की हर हरकत, उनके जहाजों की पल-पल की पोजीशन और उनके अत्याधुनिक हथियारों की मारक क्षमता अब चीन के लिए कोई राज नहीं रही। दरअसल चीन ने अपने लो अर्थ ऑर्बिट यानी एलईओ सेटेलाइट्स के जरिए अमेरिका की मिलिट्री डॉक्ट्रिन यानी युद्ध लड़ने के तरीके का एक पूरा एनसाइक्लोपीडिया तैयार कर लिया है। यह महज डाटा नहीं है बल्कि भविष्य में होने वाले किसी भी वैश्विक टकराव के लिए चीन का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है। जब दुनिया ईरान के मिसाइल हमलों को देख रही थी तब बीजिंग में बैठे वैज्ञानिक अमेरिकी रिएक्शन के हर सेकंड का हिसाब लगा रहे थे। चीन फिलहाल कम से कम तीन बड़े सेटेलाइट नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। जिनमें 300 से ज्यादा जासूसी सेटेलाइट्स शामिल हैं। लेकिन जेलन वन इनमें सबसे घातक है। 

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अमेरिका की मिसाइलें किस रास्ते से आती हैं? उनके रडार कितनी देर में लॉक हो रहे हैं? और सबसे बड़ी बात एक मिसाइल दागने के बाद सिस्टम को दोबारा प्रोग्राम करने में कितना वक्त लगता है? चीन ने यह सब रिकॉर्ड कर लिया है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में अगर चीन और अमेरिका के बीच टकराव होता है तो चीन को पहले से पता होगा कि अमेरिका के डिफेंस सिस्टम में लूप होल कहां है और उसे कैसे भेदना है। यह महज जासूसी नहीं है। यह अमेरिका की सामरिक सुरक्षा किड नी पर सीधा प्रहार है। दशकों तक अमेरिका की ताकत, उसका सरप्राइज़ एलिमेंट और उसकी अजय तकनीक रही है। लेकिन चीन के इस डाटा माइनिंग से उन रहस्य को खत्म कर दिया है। जानकारों का कहना है कि जो जानकारी चीन ने इन चंद महीनों में जुटाई है उसे हासिल करने में पारंपरिक जासूसी के जरिए 50 साल लग जाते चीन अब जानता है कि अमेरिका कैसे सोचता है और कैसे लड़ता है तो क्या अमेरिका इस नुकसान की भरपाई कर पाएगा।

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