Prabhasakshi NewsRoom: China ने अप्रैल में Arunachal Pradesh के 11 स्थानों के नाम बदले थे, अब पूरे राज्य को अपने नये मानचित्र में शामिल कर लिया

By नीरज कुमार दुबे | Aug 29, 2023

चीन है कि मानता नहीं। कभी वह भारत, ताइवान तथा दूसरे देशों के हिस्सों को अपने मानचित्र में दर्शाता है तो कभी दूसरे देशों के क्षेत्रों का नामकरण कर देता है। विस्तारवादी चीन चूंकि अब अपनी सीमा से बाहर एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं कर पा रहा है तो शायद वह ऐसी ही हरकतों से अपने को तसल्ली देता है। लेकिन उसका यह रुख दर्शाता है कि चीन की असली मंशा क्या है और समय आने तथा मौका मिलने पर चीन क्या कर सकता है। इसलिए चीन से वार्ताओं के कितने भी दौर हो जायें, उससे कितना भी हाथ मिला लिया जाये, शांति के साथ रहने के कितने ही संयुक्त बयान जारी हो जायें, इस सबके बावजूद चीन पर तनिक भी भरोसा करना बहुत बड़ी भूल होगी।

हम आपको याद दिला दें कि इसी साल अप्रैल में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के लिए 11 स्थानों के नाम अपने हिसाब से रख दिये थे जिसका भारत ने विरोध किया था। चीन इस क्षेत्र को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताकर इस पर अपना दावा करता है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के लिए 11 स्थानों के मानकीकृत नाम जारी किए थे जिसे वह स्टेट काउंसिल, चीन की कैबिनेट द्वारा जारी भौगोलिक नामों पर नियमों के अनुसार तिब्बत का दक्षिणी भाग ज़ंगनान बताता है। चीन की सरकार द्वारा संचालित ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी एक खबर में कहा था कि मंत्रालय ने 11 स्थानों के आधिकारिक नाम जारी किए हैं जिनमें दो भूमि क्षेत्रों, दो आवासीय क्षेत्रों, पांच पर्वत चोटियों और दो नदियों सहित उनके सटीक निर्देशांक भी दिए गए हैं। इसके अलावा, स्थानों के नाम और उनके अधीनस्थ प्रशासनिक जिलों की श्रेणी सूचीबद्ध की गई थी। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भारत की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजिंग में संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि ‘जंगनान’ चीनी क्षेत्र का हिस्सा है।

हम आपको बता दें कि अरुणाचल में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची 2017 में जारी की गई थी और 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई थी। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों का पुन: नामकरण ऐसे समय में किया गया था, जब पूर्वी लद्दाख में मई 2020 में दोनों देशों के बीच शुरू गतिरोध अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति अभी भी काफी गंभीर बनी हुई है, जो कई स्थानों पर दोनों देशों की सीमा पर सैनिकों की काफी करीब तैनाती के कारण भी है। 

बहरहाल, चीन द्वारा जारी किये जाने वाले मानचित्रों और नामकरणों पर भारत का यही कहना रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और ‘गढ़े’ गए नाम रखने से यह हकीकत बदल नहीं जायेगी।

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