कोरोना को लेकर एक बार फिर कटघरे में चीन, महामारी से पहले ही खरीद लिए थे बड़ी मात्रा में PCR किट

By अभिनय आकाश | Oct 06, 2021

साल 1978 में अमिताभ बच्चन की फिल्म आई थी 'डॉन' जिसमें डॉन का किरदार निभाने वाले अमिताभ मोनिका से कहते हैं कि रिवाल्वर खाली है, ये डॉन जानता है, मोनिका जानती है, लेकिन पुलिस नहीं जानती। अब दुनिया के सभी लोग पुलिस की भूमिका में है लेकिन डॉन जो है उसके सारी असलियत का पता है। कोरोना वायरस कहां से आया, कब आया और कैसे आया। इन सवालों का जब भी जिक्र बोता है तो नजर चीन पर जाकर टिकती है। लेकिन अपनी सबूतों की इमारतों पर चीन इस बात को झूठला देता है या पीछे हट जाता है। कोरोना को लेकर चीन से जुड़े खुलासे लगातार सामने आते रहे हैं। अब एक साइबर सुरक्षा फर्म द्वारा किए गए शोध से एक बड़ा खुलासा हुआ है और ये साबित होता है कि कैसे कोरोना को लेकर चीन सच पर लगातार पर्दा डालता रहा है और यहां तक की विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी अंधेरे में रखा है।

ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की संयुक्त साइबर सुरक्षा फर्म द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के जिस प्रांत में कोरोना के मामले आए और ये महामारी का केंद्र बना। उस जगह पर महीनों पहले से ही कोरोना महामारी की जांच के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली जांच किट पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) की खरीदारी बड़ी मात्रा में शुरू हो गई थी। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को चीन की ओर से कोरोना के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी थी। बता दें कि पीसीआर किट को जांचकर्ता संक्रामक या जेनेटिक बीमारी को लेकर डीएनए सैंपल की जांच करते हैं।सिक्योरिटी फर्म इंटरनेट-2.0 के मुताबिक चीन के हूबेई प्रांत में 2019 में पीसीआर टेस्ट किट की डिमांड अचानक बढ़ गई। 2019 में हुबेई प्रांत में RT-PCR टेस्ट पर 67.4 मिलियन युआन (10.5 मिलियन डॉलर) खर्च किए गए, जो 2018 में हुई टेस्टिंग से दोगुने थे। इसे हम RT-PCR टेस्ट के नाम से भी जानते हैं।

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वुहान, एक बड़ा चीनी शहर जहां वायरस के पहले ज्ञात मामले सामने आए, हुबेई प्रांत में स्थित है। 31 दिसंबर 2019 को चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बताया था कि उन्हें वुहान शहर में निमोनिया का एक अजीब केस मिला है।  इसके बाद 7 जनवरी 2020 को चीनी अधिकारियों ने नए प्रकार के कोरोना वायरस की पहचान की, जिसे SARC-CoV-2 के रूप में जाना गया। तब से, यह दुनिया के लगभग हर कोने में फैल गया है, 230 मिलियन से अधिक लोगों को संक्रमित करने के साथ ही  4.8 मिलियन से अधिक लोगों की जान ले ली है। 

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