China ने रेयर अर्थ मिनिरल्स से डराया, ट्रंप की चुनौती से रियल एस्टेट के सहारे निपटेगा भारत? जिससे बना लिए एक साल में 175 करोड़

By अभिनय आकाश | Aug 07, 2025

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥ प्रभु राम जिन्हें विनम्रता और सदाचारी कहा जाता है उन्हें भी एक बार क्रोध आ गया था। रामचरित मानस के अनुसार लंका पर चढ़ाई के लिए सेतु निर्माण आवश्‍यक था। इसके लिए भगवान श्री राम अपने भ्राता लक्ष्‍मण के साथ तीन दिन तक समुद्र से रास्‍ता देने की प्रार्थना करते रहे। लेकिन समुद्र नहीं माना। तब भगवान श्री राम ने क्रोध में कहा था कि आप लोककल्याण के मार्ग को भूलकर, अत्याचार के मार्ग पर जा चुके हैं। इसलिए आपका विनाश आवश्यक है। उनके ऐसा निश्चय करते ही समुद्र देवता थर-थर कांपने लगते हैं तथा प्रभु श्री राम से शांत होने की प्रार्थना करते हैं। ताकत के बल पर शांति लाने की बात ट्रंप भी अक्सर करते नजर आते हैं। लेकिन ट्रंप की इस नीति में थोड़ा विरोधाभास इसलिए भी नजर आता है क्योंकि ताकत के बल पर वो जब किसी को डरा या झुका नहीं पाते तो मुद्दा ही बदल देते हैं। 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को ईरान न्यूक्लियर डील से अलग किया। जिससे डील काम की नहीं रह गई। ईरान पर लगे प्रतिबंध फिर से लग गए। तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा तो बड़े देशों जिसमें हिंदुस्तान भी शामिल है ईरान से तेल लेना बंद किया। बाद में कोरोना महामारी का दौर और ईरान का तेल निर्यात खत्म हो गया। लेकिन धीरे धीरे ईरान ने इससे तेल बेचने का तरीका निकाला। ईरान ने नार्थ कोरिया को तेल दिया और बदले में हथियार लिए। 2024 में ईरान के तेल मंत्री ने कहा कि उनका देश 17 देशों को तेल बेचता है। ईरानी तेल का सबसे बड़ा आयातक इन दिनों चीन है। चीन इन दिनों अपने तेल खरीद का लगभग 15 प्रतिशत ईरान से ही लेता है। फ्रंट पॉलिसी मैगजीन के मुताबिक ईरान इन दिनों चीन को करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल देता है। जून 2025 में जब अमेरिका और इजरायल ईरान पर बमबारी कर रहे थे। तब ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा बल्कि उस दौरान ईरान ने और तेल का निर्यात किया। इजरायल चाहता था कि वो ईरान के गैस और ऑयल प्रोडक्शन पर हमला करे। लेकिन ट्रंप ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसका मतलब है कि ट्रंप को इस धंधे की पूरी जानकारी थी और वो इस रिस्क को समझते थे कि चीन की सप्लाई को सीधा निशाना बनाने पर क्या होगा। 

यही बात रूसी तेल के लिए भी लागू होती है। रूस और ईरान के सबसे बड़े तेल का खरीदार चीन है। चीन को ट्रंप ने 90 दिन की मोहलत दी क्योंकि चीन अमेरिका को अपने रेयर अर्थ मिनिरल रोकने की धमकी दे रहा है। भारत को भी ऐसा कोई दबाव अमेरिका पर बनाने की रणनीति अपनानी होगी। क्या हो सकती है वो रणनीति इसका तो पता नहीं। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने 6 अगस्त को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस भारत को ट्रंप डेड इकोनॉमी कह रहे हैं। उसी में कई बड़े बिल्डरों के साथ मिलकर मुंबई, पुणे, गुरुग्राम, कोलकाता में प्रॉपर्टी खरीदी है। 

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भारत में कैसे चलता है ट्रंप का बिज़नेस ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही भारत को एक "डेड इकोनॉमी" बताते हैं। लेकिन उनके परिवार द्वारा नियंत्रित द ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन के लिए भारत पिछले 10 वर्षों में अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा बाज़ार है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले साल तक इसने कई शीर्ष बिल्डरों के साथ गठजोड़ किए और मुंबई, पुणे, कोलकाता और गुरुग्राम में सात परियोजनाओं से कम से कम 175 करोड़ रुपये कमाए। पिछले आठ महीनों में ब्रांड ट्रंप भारत में आक्रामक विस्तार अभियान चला रहा है। 5 नवंबर, 2024 को संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में उनके चुनाव के तुरंत बाद, द ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन ने अपने भारतीय साझेदार ट्रिबेका डेवलपर्स के साथ मिलकर गुरुग्राम, पुणे, हैदराबाद, मुंबई, नोएडा और बेंगलुरु में कम से कम छह परियोजनाओं की घोषणा की, जिससे 80 लाख वर्ग फुट का रियल्टी विकास क्षेत्र विकसित होगा। इनसे ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन की कमाई का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़े बिल्डरों के साथ इसकी साझेदारी न केवल ट्रम्प एंटरप्राइज को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में सबसे आकर्षक बाजारों में प्रवेश करने की अनुमति देती है, बल्कि बिना किसी वित्तीय जोखिम के इसे निरंतर राजस्व प्रवाह भी प्रदान करती है। 

अब तक बन चुके हैं कई प्रोजेक्ट

2012 में भारत में घोषित पहली परियोजना से लेकर, ब्रांड ट्रम्प का विस्तार इन परियोजनाओं के पूरा होने तक, लगभग चार गुना बढ़कर 11 मिलियन वर्ग फुट हो जाएगा, जो पिछले साल तक विकसित किए गए लगभग 3 मिलियन वर्ग फुट से एक बड़ी छलांग है। ट्रिबेका ने इस साल मार्च में पुणे में अपनी पहली वाणिज्यिक विकास परियोजना के शुभारंभ के दौरान बताया कि इन नए उपक्रमों से कम से कम 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित बिक्री क्षमता है। ट्रम्प ऑर्गनाइज़ेशन सीधे निर्माण में निवेश नहीं करता है। यह अपने ब्रांड को अग्रिम लाइसेंस शुल्क या विकास शुल्क के लिए उधार देता है, जो निर्माण से जुड़ा हो सकता है या, ज़्यादातर मामलों में, परियोजना की बिक्री में 3-5 प्रतिशत की हिस्सेदारी हो सकती है। इन संपत्तियों को आमतौर पर लग्ज़री डेवलपमेंट के रूप में बिल किया जाता है, और राष्ट्रपति के नाम से जुड़े होने के कारण फ्लैटों की कीमत अधिक होती है। भारत में इन परियोजनाओं को क्रियान्वित करने वालों में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) जैसी बड़ी कंपनियाँ और लोढ़ा समूह, एम3एम समूह, पंचशील रियल्टी, आईआरए इंफ्रा और यूनिमार्क जैसी स्थापित रियल एस्टेट कंपनियाँ शामिल हैं। कल्पेश मेहता के नेतृत्व वाली ट्रिबेका डेवलपर्स भारत में द ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन की आधिकारिक साझेदार है।

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एक साल में 175 करोड़ का फायदा 

एक साल से भी कम समय में ट्रंप की कंपनी को 175 करोड़ से ज्यादा का फायदा हुआ है।  भारत में ट्रंप के नाम से कुल 13 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। पुणे में एक प्रोजेक्ट के लॉन्च के दौरान ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने कहा, भारत ने हमारे ब्रांड को जबरदस्त उत्साह के साथ अपनाया है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर भारत को हमारे बिजनेस के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बता चुके हैं।द ट्रंप ऑर्गनाइजेशन न्यूयॉर्क की एक पारिवारिक कंपनी है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू किया था। 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कंपनी के रोज़ाना के कामकाज से खुद को अलग कर लिया और सारी ज़िम्मेदारी अपने बेटों को दे दी, लेकिन कंपनी पर उनका मालिकाना हक अब भी बरकरार है। अब प्रॉपर्टी का काम कितने कायदे से होता है और कितने रूल्स फॉलो होते हैं। किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में क्या सरकार डीलिंग की जांच करेगी? 

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