By अभिनय आकाश | May 25, 2026
तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का अगला अवतार। दरअसल चीन ने एक बार फिर गीदड़ भभकी दे दी है। चीनी दूतावास की प्रवक्ता हैं यू जिन जिन्होंने साफ शब्दों में भारत को चेतावनी दे डाली है कि वो दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में हस्तक्षेप बिल्कुल ना करें। चीन का साफ कहना है कि यह उनका आंतरिक मामला है। लेकिन सवाल तो यह है कि आखिर जिस देश की सरकार नास्तिकता में विश्वास रखती है, वह एक आध्यात्मिक अवतार के लिए इतना बेचैन क्यों है? दरअसल चीनी प्रवक्ता यूजिंग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म पूरी तरह चीन का आंतरिक मसला है। उन्होंने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन यानी कि तिब्बत की निर्वासी सरकार को अवैध बताया और कहा कि भारत को तिब्बत की आजादी की वकालत करने वालों को मंच नहीं देना चाहिए। लेकिन चीन की इस बौखलाहट की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है। हाल ही में भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने खुलकर कहा कि जो लोग दलाई लामा को मानते हैं उनका यह मानना है कि पुनर्जन्म का फैसला दलाई लामा की इच्छा और परंपरा के अनुसार होना चाहिए। अब भारत का यह कड़ा रुख ही चीन की परेशानी की सबसे बड़ी वजह बन चुका है।
यह प्रक्रिया जितनी रहस्यमई होती है, उतनी ही पवित्र भी होती है। दरअसल, तिब्बती बौद्ध धर्म में यह कोई चुनाव नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक खोज है। वर्तमान दलाई लामा अपनी मृत्यु से पहले कुछ संकेत छोड़ जाते हैं। जैसे कोई कविता या पत्र जो उनके अगले जन्म की दिशा बताते हैं। वरिष्ठ भिक्षु तिब्बत की लुहमा, लातसो पवित्र झील पर जाकर ध्यान लगाते हैं। कहते हैं कि झील के पानी में उन्हें उन रास्तों या घरों के दृश्य दिखाई देते हैं जहां बच्चे का जन्म हुआ है। भिक्षु भेष बदलकर उन जगहों पर जाते हैं और ऐसे बच्चों की तलाश करते हैं जिनमें अद्भुत लक्षण हो। फिर आता है अंतिम परीक्षा। दरअसल यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है दोस्तों। बच्चे के सामने कई वस्तुएं रखी जाती है। कुछ पिछले दलाई लामा को असली चीजें जैसे कि चश्मा, माला और कुछ उनकी नकल। अगर बच्चा बिना गलती के अपने पिछले जन्म की चीजों को पहचान लेता है तो उसे अवतार मान लिया जाता है।