चीन ने युद्ध छेड़ा तो उसका सामना नये भारत की सशक्त सेना से होगा

By योगेश कुमार गोयल | Sep 21, 2020

लद्दाख में सीमा पर हालात को लेकर लोकसभा में बयान देकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूरी दुनिया के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि किस प्रकार चीन 1993 तथा 1996 के समझौतों का उल्लंघन करते हुए एलएसी पर भारी मात्रा में जवानों की तैनाती कर रहा है। उनके मुताबिक चीन ने समझौतों का सम्मान नहीं किया और एलएसी के अंदर बड़ी संख्या में जवानों और हथियारों को तैनात किया है। इसी वजह से एलएसी के आसपास टकराव की स्थितियां बरकरार हैं। रक्षा मंत्री ने संसद में अपने सम्बोधन में स्पष्ट किया कि भारत-चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में अब तक आमतौर पर एलएसी नहीं है और एलएसी को लेकर दोनों देशों की धारणा अलग-अलग है लेकिन 1993 और 1996 के समझौतों में स्पष्ट उल्लेख है कि दोनों देश एलएसी के पास अपनी-अपनी सेनाओं की संख्या न्यूनतम रखेंगे। रक्षा मंत्री के अनुसार समझौते में यह भी कहा गया है कि सीमा के मुद्दे का जब तक पूर्ण समाधान नहीं हो जाता, तब तक एलएसी पर इस समझौते का उल्लंघन नहीं किया जाएगा लेकिन इस वर्ष अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन की सेना और उनके आयुध में वृद्धि देखी गई। मई माह की शुरूआत में चीन ने गलवान घाटी में भारतीय सेना की सामान्य और पारम्परिक गश्त को रोकना शुरू किया, जिससे आमने-सामने की स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि सैन्य और राजनयिक वार्ताओं के जरिये पूर्वी लद्दाख में गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रयास किए जाते रहे हैं लेकिन आम सहमतियों के बावजूद ड्रैगन लगातार वादाखिलाफी करता रहा है। बीते 20 दिनों में ही ड्रैगन सीमा विवाद को लेकर तीन बार फायरिंग कर चुका है।

हाल ही में हुए खुलासे के अनुसार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी कम्पनी झेनहुआ डेटा इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी भारतीय राजनेताओं, रक्षा विशेषज्ञों और महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों सहित दस हजार से अधिक लोगों का डाटा गोपनीय तरीके से एकत्रित कर चीन भेज रही थी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डाटा संग्रहण तकनीकों के जरिये चीनी कम्पनी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर महत्वपूर्ण व्यक्तियों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी कर रही थी। आसानी से समझा जा सकता है कि इस प्रकार डाटा चुराकर उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ रणनीतिक हथियार के तौर पर किया जा सकता है। जासूस ड्रैगन की ऐसी खतरनाक साजिशों के परिणाम आने वाले समय इसलिए अत्यंत घातक हो सकते हैं क्योंकि 21वीं सदी में युद्ध परम्परागत तौर-तरीकों के बजाय विभिन्न मोर्चों पर तकनीक निपुणता के बलबूते पर लड़े जा रहे हैं और आज के आधुनिक युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डाटा संग्रहण तकनीकें गोला-बारूद से भी ज्यादा घातक सिद्ध हो सकती हैं।

हालांकि ड्रैगन को कूटनीतिक और आर्थिक झटके लगातार लग रहे हैं लेकिन वह तरह-तरह की साजिशें रचने से बाज नहीं आ रहा। भारत की पहल पर अमेरिका सहित कई देश उसके कई एप पर पांबदी लगा चुके हैं और चीन के साथ कइयों के व्यापारिक रिश्ते भी प्रभावित हुए हैं। हाल ही में लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यरत संयुक्त राष्ट्र के सीएसडब्ल्यू (कमीशन ऑन द स्टेटस ऑफ वुमेन) चुनाव में भारत ने चीन को हराते हुए उसे बड़ा झटका दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन को इस चुनाव में महज 27 वोट मिले जबकि भारत को 38 वोट प्राप्त हुए। इन झटकों के अलावा लद्दाख में भी भारतीय जांबाज चीनी सैनिकों को ऐसी पटखनी दे रहे हैं, जिससे ड्रैगन बुरी तरह बौखलाया हुआ है। पूर्वी लद्दाख में रेजांग लॉ और रेचेन लॉ की रणनीतिक ऊंचाइयों पर घुसपैठ में नाकाम होने के बाद अब वह एलएसी के दूसरे इलाकों में अपनी फौज का जमावड़ा करने में जुट गया है। लद्दाख के अलावा अब उसकी गतिविधियां डोकलाम और भूटान के साथ अरूणाचल प्रदेश में भी बढ़ने लगी हैं। बताया जा रहा है कि चीनी सेना पीएलए ने एलएसी पर तैनात अपने सैनिकों को आदेश दिया है कि वे अपने प्रियजनों को ‘अलविदा पत्र’ लिखने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करें। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक पीएलए अपने सैनिकों को युद्ध के मैदान में जाने से पहले इस तरह के आदेश देती है।

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हालांकि हमारी जांबाज सेना ड्रैगन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। ड्रैगन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर रक्षा मंत्री ने लोकसभा में दो टूक शब्दों में कहा है कि भारतीय सेना बातचीत के जरिये सीमा विवाद निपटाना चाहती है लेकिन अगर चीन नहीं मानता है तो हम हर परिस्थिति के लिए तैयार हैं। रक्षा मंत्री के बयानों के बाद बौखलाये चीन की प्रतिक्रियाओं के जवाब में अब हमारी सेना ने भी बड़ा बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अगर सर्दी के मौसम में जंग के हालात बनते हैं तो चीन का मुकाबला भारत की ऐसी सेना से होगा, जो कि सक्षम और सशक्त रूप में उसके सामने खड़ी होगी। देश के पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी भाग में भारतीय वायुसेना पहले से ही अलर्ट मोड पर है और लद्दाख में ठंड के वक्त किसी सामरिक स्थिति के पैदा होने पर मुकाबले के लिए भी भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है। सेना की ओर से कहा गया है कि चीन ने अगर युद्ध के लिए स्थितियां निर्मित कीं तो उसका सामना बेहतर प्रशिक्षित, बेहतर तरीके से तैयार और मनोवैज्ञानिक रूप से कठोर भारतीय सैनिकों से होगा।

उल्लेखनीय है कि लद्दाख रेंज के सभी इलाके उच्चतम पर्वतीय क्षेत्रों में आते हैं और ऐसी ही कई चोटियों पर भारतीय सेना का कब्जा हो चुका है। नवम्बर-दिसम्बर में इन इलाकों में भारी बर्फबारी होती है और वहां का न्यूनतम तापमान -30 से -40 डिग्री तक पहुंच जाता है। यह सैनिकों के लिए ऐसा कठिनतम समय होता है, जब प्रायः लद्दाख को जोड़ने वाले सभी रास्ते बंद हो जाते हैं लेकिन ऐसी तमाम परिस्थितियों के लिए भी हमारे जांबाज पूरी तरह तैयार हैं। दरअसल हमारे सैनिकों के पास ऐसे इलाकों में ड्यूटी करने का लंबा अनुभव रहा है और वे एक शॉर्ट नोटिस पर भी किसी भी स्थिति में जाने के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे जांबाजों को ज्यादा परेशानी न हो, इसीलिए ऐसी कठिन परिस्थितियों में रास्तों के अवरूद्ध होने पर बर्फ हटाने के आधुनिक सामानों के अलावा अन्य जरूरी साजो-सामान भी लद्दाख को जोड़ने वाले सभी रास्तों पर तैनात किया जा चुका है। लद्दाख में सेना के जवानों को सैन्य वाहनों, टैंक या किसी भी तरह की अन्य मशीनरी के संचालन के लिए ईंधन की कमी न हो, इसके लिए भी पर्याप्त मात्रा में ईंधन और स्पेशल ल्यूब्रिकेंट्स का इंतजाम किया जा चुका है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार चीनी सैनिकों को मैदानी और ऊंचे इलाकों में जंग का कोई अनुभव नहीं है और ड्रैगन की अवधारणा सदैव बगैर लड़े युद्धों को जीतने की रही है लेकिन अब परिस्थितियां दशकों पहले जैसी नहीं हैं। आज भारतीय सेना बेहद ताकतवर है जबकि हमारे जांबाजों की तुलना में चीनी सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर माने जाते हैं। हालांकि सेना की तमाम तैयारियों के साथ-साथ तीनों सेनाओं को साइबर युद्ध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस तकनीकों से मुकाबले के लिए भी तैयार करने की सख्त जरूरत है।

-योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं)

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