चीन के J16D लड़ाकू विमान से क्या बढ़ जाएंगी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में भारत की मुश्किलें

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 08, 2021

भारत से जारी तनाव के बीच  चीन ने अपने सबसे आधुनिक J-16D लड़ाकू विमान को युद्धाभ्यास के लिए उतार दिया है। यह लड़ाकू विमान इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में माहिर है।  ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीनी वायु सेना का जे -16 डी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान युद्ध की ट्रेनिंग कर रहा है। चीन का इरादा जे -16 डी को जे-20 लड़ाकू विमान के साथ जंग के मैदान में उतारने का है। चीन इस लड़ाकू विमान को ग्वांगडोंग प्रांत के झुहाई में  हाल ही में आयोजित एयरशो चाइना 2021 में प्रदर्शित कर चुका है ।


चीन ने J-16D लड़ाकू विमान को युद्धाभ्यास के लिए किया तैनात


J-16D लड़ाकू विमान को पहली बार वास्तविक युद्धाभ्यास के लिए तैनात किया गया है। ग्लोबल टाइम्स ने  चीनी एक्सपर्ट के हवाले से बताया कि वास्तविक युद्धाभ्यास का मतलब जे-20डी लड़ाकू विमान की युद्धक क्षमताओं का साबित करने से है। इससे चीनी वायु सेना भी इस नए लड़ाकू विमान की ताकत और कमजोरियों से अच्छी तरह से परिचित हो जाएगी । चीन ने इस लड़ाकू विमान को अपने पुराने जे-16 लड़ाकू विमान को अपग्रेड कर बनाया है। जे-16डी लड़ाकू विमान से चीनी वायु सेना की युद्धक क्षमताओं में काफी इजाफा होने की उम्मीद है। हालांकि अभी तक यह लड़ाकू विमान पूरी तरह से चीनी वायु सेना में तैनात नहीं हो सका है। वास्तविक युद्ध की स्थिति में यह लड़ाकू विमान अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से दुश्मन में खलबली मचा सकता है। इससे दुश्मन के कम्यूनिकेशन और सर्विलांस सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं। J-16D इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जेट दूसरे लड़ाकू विमानों के साथ जंग के मैदान में कहर बरपा सकता है।


इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में  माहिर है J-16D लड़ाकू विमान


 J-16D और मूल J-16 के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि नया वाला जJ-16D कई तरह के आधुनिक उपकरणों की एक विस्तृत सीरीज को लेकर उड़ान भर सकता है। इस लड़ाकू विमान के पंखों के नीचे छोटे उपकरण, जबकि बीच वाले हिस्से में भारी उपकरणों को लगाया जा सकता है। इस विमान में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, कम्यूनिकेशन डिस्ट्रप्शन और रडार जाम करने वाले उपकरण लगे हुए हैं। इसके अलावा इसमें हवा से हवा में मार करने वाली कई आधुनिक मिसाइलें भी लगी हैं। चीनी वायु सेना का J-16 D विमान J-20 के साथ मिलकर दुश्मनों पर भारी पड़ेगा। एक लड़ाकू विमान दुश्मन के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को बंद कर देगा और रडार को जाम कर देगा, जबकि J-20 खुद ही स्टील्थ तकनीक से लैस है। ऐसी स्थिति में वह दुश्मन के ऊपर सटीक हमला कर सकता है। ऐसे में दुश्मन को जवाबी कार्रवाई का मौका भी नहीं मिलेगा। आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 और सुखोई एसयू 30 लड़ाकू विमान को चीन के J-10, J-11 और SU-27 लड़ाकू विमानों पर बढ़त हासिल है। चीन ने भारत से लगी सीमा पर इन्हीं विमानों को तैनात किया है। भारतीय मिराज 2000 और SU -30 जेट्स ऑल-वेदर, मल्टी-रोल विमान हैं जबकि चीन का जJ-10 ही ऐसी योग्यता रखता है। बेलफर की स्टडी बताती है कि चीन ने अपने पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों को अमेरिका के कथित खतरे से बचाने के लिए मजबूत किया है। इस कारण पश्चिमी क्षेत्र में उसके चार एयरफील्ड कमजोर हुए हैं।

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