By अनन्या मिश्रा | Feb 17, 2026
आज यानी की 17 फरवरी को भारत राष्ट्र समिति के नेता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह केसीआर के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। वहीं उन्होंने अपनी पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति कर दिया है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर के चंद्रशेखर राव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
तेलंगाना के चंतामदका में 17 फरवरी 1954 को कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम राघवार राव और मां का नाम वेंकटम्मा है। उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई की है। वहीं सिद्धिपेट डिग्री कॉलेज से ऑप्शनल सब्जेक्ट्स तेलुगू साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है।
केसीआर ने अपनी सियासी पारी की शुरूआत छात्र राजनीति से की थी। उन्होंने सिद्धिपेट डिग्री कॉलेज से पढ़ाई के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। लेकिन इस दौरान उनको हार मिली थी। डिग्री कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दिल्ली की सियासत करना चाहते थे। जिसके लिए वह साल 1975 में दिल्ली भी गए। लेकिन इस दौरान आपातकाल लग गया। जिसके बाद केसीआर संजय विचार मंच में शामिल हो गए। लेकिन संजय गांधी की मौत के बाद वह सिद्धिपेट वापस आ गए।
एक बार मुख्यमंत्री मैरी चेन्ना रेड्डी किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सिद्धिपेट गए थे। उस समय केसीआर मंच से भाषण दे रहे थे, लेकिन जब उनका भाषण खत्म होने लगा, तो सीएम रेड्डी ने कहा कि यह युवक अच्छा भाषण दे रहा है, उसको बोलने दो। इसके बाद चेन्ना रेड्डी के घर जाने लगे।
साल 1980 में संजय गांधी के मार्गदर्शन में केसीआर ने आंध्र प्रदेश युवा कांग्रेस में शामिल हुए। साल 1982 में वह राघवपुर प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, सिद्धिपेट के अध्यक्ष चुने गए। फिर वह युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी बनें। साल 1985 में केसीआर ने तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हुए। इस साल वह सिद्धिपेट से विधायक बने। फिर साल 1987 में उनको राज्यमंत्री बने और साल 1989 में फिर से सिद्धिपेट से विधायक बने।
साल 1989 से लेकर 1993 तक वह टीडीपी के जिला अध्यक्ष भी रहे। फिर साल 1993 में केसीआर को टीडीपी का राज्य सचिव बनाया गया। वह लगातार राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल करते रहे। साल 1997 में आंध्र प्रदेश सरकार में वह परिवहन मंत्री बने और साल 1999 में विधानसभा का उपसभापति बनाया गया। साल 2001 में उन्होंने विधायक और उपसभापति के पद से इस्तीफा दे दिया।
वहीं तेलंगाना राज्य को लेकर मांग तेज होने लगी और साल 2009 में केसीआर ने आमरण अनशन शुरूकर दिया। फिर 9 दिसंबर को केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। सीमांध्र और रायलसीमा के सांसदों और विधायकों ने इस्तीफा ले दिया। जिसके बाद 18 फरवरी 2014 को लोकसभा से तेलंगाना विधायक पास हो गया। वहीं कई प्रक्रियाओं के बाद 02 जून 2014 को तेलंगाना राज्य बना। फिर 2014 में तेलंगाना राज्य अस्तित्व में आया और 02 जून को केसीआर तेलंगाना के पहले सीएम बने। फिर साल 2018 में वह दूसरी बार तेलंगाना के सीएम बनें।