मणिपुर में चर्चों की राजनीति, राज्य में तेजी से बढ़ी ईसाइयों की जनसंख्‍या

By अभिनय आकाश | Dec 29, 2021

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले कुछ महीनों में होने हैं। पूर्वोत्तर के एक अहम राज्य मणिपुर भी उनमें से एक है। साठ सीटों वाली विधान सभा को समेटे इस प्रदेश में दूर तक फैली हरियाली, उदारवादी जलवायु और परंपरा का सुंदर मिश्रण देखने का मिलता है। प्रदेश मे दशकों से उग्रवाद,अलगाववाद, हिंसा और बगावत का ऐसा सिलसिला जारी है, जिसने यहां के लोगों की तरक्की रोक दी है। वैसे अगर पूर्वोत्तर के राज्यों में असम को छोड़ दें तो बाकी किसी भी राज्य में होने वाले चुनावों में मीडिया की तरफ से खासा तवज्यो नहीं दी जाती है। जिसके पीछे की बड़ी वजह उन राज्यों मे राजनीति फेरबदल का राष्ट्र की मुख्यधारा की राजनीति पर कोई असर नहीं होना है।

मणिपुर एक नजर...

मणिपुर राज्य सन् 1949 में भारत का हिस्सा बना था और 1972 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में नगा समुदाय और मैदानी भागों में मैतेयी समुदाय निवास करता है। मैतेयी समुदाय अधिक विकसित है, और राजनीतिक तौर पर दोनो के बीच तनाव का लंबा इतिहास रहा है। मणिपुर के पहाड़ी हिस्से में ज्यादातर नगा आबादी रहती है।  नगा जनजाति ईसाई धर्म को मानती है, तो घाटी में रहने वाले अधिकांश लोग हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। 

इसे भी पढ़ें: मणिपुर: विदेश से लौटे तीन लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए, ओमाइक्रोन के परीक्षण के लिए भेजे गए नमूने

राजनीतिक समीकरण

मणिपुर एक छोटा राज्य है। यहां एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन करीब 30 हजार वोटर ही होते हैं। इसलिए यहां की चुनावी रणनीति अन्य राज्यों से अलग है। 2017 में भाजपा को 60 में 21 सीटें मिलीं थीं और उसे गठबंधन सरकार के लिए मजबूर होना पड़ा था। 28 सीटें जीत कर भी कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी। मणिपुर की राजनीति में विचारवाद से अधिक अवसरवाद प्रभावी रहा है। दल-बदल यहां एक सामान्य प्रवृति है। इसकी वजह से राजनीतिक हालात के बदलते देर नहीं लगती।

ईसाई आबादी 

मणिपुर में ईसाई आबादी जो 1961 में 19 प्रतिशत थी वो 2011 में बढ़कर 41 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मणिपुर में 2.8 लाख आबादी में ईसाईयों की संख्या बढ़ी है। 1961 में कुल आबादी में हिंदुओं का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा था, जबकि ईसाईयों का 19 प्रतिशत हिस्सा था। 2011 में ईसाई और हिंदूओं की लगभग बराबर हिस्सेदारी है। 

चर्च और धर्मांतरण

मणिपुर उत्तर पूर्व के उन राज्यों में से एक है जहां पर ईसाई मिशनरीज का अच्छा-खासा प्रभाव है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चर्च की तरफ से कांग्रेस को वोट देने की अपील तक जारी की गई थी। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमीनी तैयारियों के कारण वो अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सकी। यह भी उल्लेखनीय है कि मणिपुर में आरएसएस 1952 से सक्रिय है। वर्तमान में राज्य में इसकी 115 इकाइयां काम कर रही हैं। ये इकाइयां शाखा, मिलन और मंडली के रूप में हैं। संघ राज्य के पांच जिलों में स्कूल भी चलाता है। आखिर वक्त तक ईसाई मिशनरी ने  नगा किश्चिय्न पार्टी (एनपीएफ) के नेताओं को मनाने की भरपूर कोशिश की। लेकिन हेमंता बिश्व सरमा उन्हें अपनी तरफ मोड़ने में सफल हुए। 


All the updates here:

प्रमुख खबरें

Pakistan vs New Zealand मैच बारिश में धुला, Super 8 में Semifinal का समीकरण हुआ बेहद रोमांचक

NASA के Artemis-2 Moon Mission को लगा बड़ा झटका, रॉकेट में आई खराबी के कारण लॉन्च टला

Nico O’Reilly के डबल धमाके से जीती Manchester City, Premier League की खिताबी दौड़ हुई रोमांचक

Qatar Open Final में Carlos Alcaraz का तूफान, 50 मिनट में फिल्स को रौंदकर जीता खिताब