By अभिनय आकाश | Jul 24, 2026
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि अदालत के सामने ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल एक अभ्यावेदन (रिप्रेजेंटेशन) मिला था, न कि कोई रिट याचिका। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह से गलत हैं जिनमें कहा गया था कि उन्होंने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था। शुक्रवार को जब वकील ज़रूरी मामलों को लिस्ट करने की बात कर रहे थे, तो सीजेआई ने कहा कि पिछले दो दिनों में एक पूरी तरह से झूठा बयान दिया गया कि कोई मामला दायर किया गया था और मीडिया बिना किसी ज़िम्मेदारी के गलत रिपोर्टिंग कर रहा है कि चीफ जस्टिस ने मामले को लिस्ट करने से इनकार कर दिया।
जब वकील ने फिर से कहा कि छात्रों की पिटाई की गई थी और दोबारा वीडियो सबूत का ज़िक्र किया, तो सीजेआई ने कहा कि हमारा समय बर्बाद न करें। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते। 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी NEET परीक्षा लीक मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। संक्षेप में मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को कहा कि उनके द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार करने की खबरें गलत हैं, क्योंकि कोई याचिका दायर नहीं की गई थी और केवल एक अभ्यावेदन अदालत को भेजा गया था।