Mercedes India प्रमुख Santosh Iyer बोले, BMW से आगे रहने के लिए कारों की कीमतें नहीं घटाएंगे

By Ankit Jaiswal | Sep 13, 2026

भारतीय लग्जरी कार बाजार में मर्सिडीज-बेंज की बादशाहत को एक दशक से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब मुकाबला पहले जैसा एकतरफा नहीं रहा है। बीएमडब्ल्यू लगातार अंतर कम कर रही है और 2026 की पहली छमाही में वाहन पंजीकरण के आंकड़ों में वह मर्सिडीज-बेंज से आगे भी निकल चुकी है। इसी बीच मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष अय्यर ने बिक्री में नंबर एक बने रहने की होड़ को लेकर कंपनी की रणनीति साफ कर दी है।

गौरतलब है कि मर्सिडीज-बेंज भारत में 2015 से लग्जरी कार बाजार की अग्रणी कंपनी बनी हुई है। उस साल कंपनी ने 13,502 कारें बेची थीं, जबकि बीएमडब्ल्यू इंडिया की बिक्री 6,550 इकाइयों पर रही थी। यानी दोनों कंपनियों के बीच 6,952 कारों का बड़ा अंतर था। 2018 तक यह अंतर 5,000 से ज्यादा रहा और 2019 में भी मर्सिडीज 4,786 कारों की बढ़त के साथ आगे थी।

महामारी के बाद भी मर्सिडीज ने अपनी बढ़त बनाए रखी। 2022 में दोनों कंपनियों के बीच अंतर 4,554 कारों का था, जबकि 2023 में यह 4,105 और 2024 में 4,553 कार रहा। लेकिन 2025 में तस्वीर तेजी से बदली। मर्सिडीज की बिक्री मामूली गिरावट के साथ 19,007 कारों पर आ गई, जबकि बीएमडब्ल्यू ने 17,271 कारें बेचकर अंतर घटाकर सिर्फ 1,736 इकाइयों का कर दिया। यह 2015 के बाद किसी पूरे साल में दोनों कंपनियों के बीच सबसे कम अंतर था।

मौजूदा स्थिति में बीएमडब्ल्यू अपनी भारत में मौजूदगी और मजबूत करने पर जोर दे रही है। कंपनी ने लंबी दूरी वाले पहियों के आधार पर तैयार कारों, खेल उपयोगिता वाहनों और बिजली से चलने वाले वाहनों पर विशेष ध्यान दिया है। हाल में एक्स1 लंबी दूरी वाला संस्करण और भारत में तैयार की जाने वाली आई5 लंबी दूरी वाली कार पेश की गई हैं। इसके अलावा नई 7 श्रृंखला और आई7 ने भी कंपनी की ऊंची श्रेणी की कारों की पेशकश को मजबूत किया है।

बता दें कि बीएमडब्ल्यू वैश्विक स्तर पर भी मर्सिडीज-बेंज को पीछे छोड़ चुकी है। 2021 में बीएमडब्ल्यू ने दुनिया भर में प्रीमियम कारों की बिक्री में मर्सिडीज को पछाड़ दिया था और उसके बाद से बढ़त बनाए रखी है। भारत में हालांकि मर्सिडीज अब तक कंपनी की ओर से जारी सालाना बिक्री के आधार पर आगे रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में दोनों कंपनियों के बीच मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

लेकिन मर्सिडीज सिर्फ बिक्री बढ़ाने के लिए भारी छूट देने के पक्ष में नहीं है। संतोष अय्यर के मुताबिक छूट देकर ज्यादा कार बेचना आसान है, लेकिन इससे पहले कार खरीद चुके ग्राहकों को नुकसान हो सकता है और पुरानी कारों की दोबारा बिक्री कीमत भी प्रभावित हो सकती है। कंपनी अपने भविष्य के खुदरा बिक्री मॉडल में छूट की व्यवस्था को भी एक समान रखने पर जोर दे रही है।

संतोष अय्यर ने यह भी कहा कि केवल कारों की संख्या से कंपनी की पूरी स्थिति नहीं समझी जा सकती। उनके अनुसार मर्सिडीज का वाहन मिश्रण और ग्राहक वर्ग ऐसा है कि कुल आय के मामले में कंपनी बीएमडब्ल्यू से काफी आगे है। ऐसे में मर्सिडीज के लिए बिक्री की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उत्पाद, ग्राहक अनुभव, कीमतों की स्थिरता और वाहन की दोबारा बिक्री कीमत को बनाए रखना है। भारतीय लग्जरी कार बाजार में बदलती प्रतिस्पर्धा के बीच यही रणनीति आने वाले वर्षों में मर्सिडीज की असली परीक्षा और उसकी पहचान है।

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