By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता द्वारा लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायाधीश को ‘‘अपना पक्ष रखने का उचित अवसर’’ दिया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता ने प्रधान न्यायाधीश को लिखे अपने तीन पत्रों में न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और उनसे राजस्थान उच्च न्यायालय में राज्य के बाहर से किसी स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने का आग्रह किया है। न्यायमूर्ति मेहता ने दो, 10 और 17 अगस्त को लिखे अपने तीन पत्रों में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर ‘‘कुप्रशासन’’, ‘‘कदाचार’’, ‘‘भाई-भतीजावाद’’ और ‘‘पक्षपात’’ के आरोप लगाए हैं।
बयान में कहा गया, ‘‘प्रधान न्यायाधीश ने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्चतम न्यायालय न्यायाधीशों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों का फैसला मीडिया में किए जाने वाले परस्पर विरोधी दावों के आधार पर नहीं होने दे सकता।’’ प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि वह और कॉलेजियम के अन्य सदस्य शेष उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर पहले से काम कर रहे हैं।