By अभिनय आकाश | Mar 31, 2022
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय को जिलेवार परिभाषित करने की वकालत करती है। सरमा ने कहा कि राज्य दिल्ली भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के निर्देश की मांग करने वाली जनहित याचिका के आधार पर चल रहे सुप्रीम कोर्ट के मामले में पक्षकार बनने की कोशिश करेगा। इस मामले में केंद्र ने हाल ही में शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया है कि राज्य हिंदुओं को "अल्पसंख्यक" का दर्जा देने पर विचार कर सकते हैं यदि समुदाय उनके अधिकार क्षेत्र में बहुसंख्यक नहीं है।
राज्य सरकार का मानना है कि अल्पसंख्यक की परिभाषा जिलेवार बदली जानी चाहिए। हम अश्विनी उपाध्याय मामले में असम सरकार को पक्षकार बनाने का प्रयास करेंगे और अल्पसंख्यकों को जिलेवार परिभाषित करने पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सरमा ने कहा कि मैंने गृह मंत्री अमित शाह से इस पर चर्चा की है। लेकिन, राज्य के पार्टी बनने की कोई गुंजाइश है या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करता है।' सरमा ने कहा कि केंद्र सरकार भी अल्पसंख्यकों को उनके आर्थिक, शैक्षिक, लिंग और अन्य सामाजिक मानकों पर विचार करते हुए जिला और ब्लॉक-वार परिभाषित करने के पक्ष में है। भाषाई अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में, बराक घाटी और धुबरी जिले में बंगाली अल्पसंख्यक नहीं हैं, लेकिन वे डिब्रूगढ़ और ऊपरी असम क्षेत्रों में अल्पसंख्यक हैं।