Caste Census पर CM Stalin का PM Modi को पत्र, बोले- राज्यों से भी हो व्यापक परामर्श

By अंकित सिंह | Jan 10, 2026

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के जातिगत गणना को शामिल करने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने राज्यों के साथ व्यापक परामर्श करने का आग्रह किया है ताकि यह संवेदनशील कार्य सावधानीपूर्वक और सहयोगात्मक संघवाद की भावना से संपन्न हो सके। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में स्टालिन ने कहा कि जनगणना में जातिगत विवरण शामिल करने के इस कदम के सामाजिक न्याय, निष्पक्ष नीति निर्माण और हमारे राष्ट्र की संघीय संरचना पर दूरगामी प्रभाव होंगे।

 

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स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु लंबे समय से एक व्यापक जाति-आधारित जनगणना की मांग कर रहा है ताकि ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने और लक्षित कल्याणकारी उपायों को लागू करने के लिए विश्वसनीय आंकड़े प्राप्त किए जा सकें। स्टालिन ने लिखा कि मैं जनगणना में जातिगत विवरणों को शामिल किए जाने का स्वागत करता हूँ, क्योंकि यह ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने और लक्षित कल्याणकारी उपायों को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक, विश्वसनीय डेटा की तमिलनाडु सरकार की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप है। उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय सबूत-आधारित सामाजिक न्याय के लिए हमारी निरंतर वकालत को पुष्ट करता है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि तमिलनाडु इस मांग में अग्रणी रहा है, और राज्य विधानसभा ने केंद्र सरकार से दशकवार जनसंख्या गणना के साथ-साथ जाति-आधारित जनगणना कराने का आग्रह करते हुए प्रस्ताव पारित किए हैं। हालांकि, स्टालिन ने चेतावनी दी कि जाति गणना एक अत्यंत संवेदनशील मामला है जो गहरी सामाजिक गतिशीलता, जाति संरचनाओं में क्षेत्रीय भिन्नताओं और यदि अत्यंत सावधानी से न संभाला जाए तो अनपेक्षित सामाजिक तनावों की संभावना को प्रभावित करता है।

 

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उन्होंने कहा कि सटीकता और जनविश्वास सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नों, श्रेणियों, उप-श्रेणियों और डेटा संग्रह की कार्यप्रणाली का निर्धारण सटीक, समावेशी और अस्पष्टता रहित होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इन पहलुओं में कमियों से विवाद, गलतियाँ या सामाजिक विभाजन और भी बढ़ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया के संघीय आयाम पर जोर देते हुए कहा कि यद्यपि जनगणना केंद्र सरकार का विषय है, फिर भी इसके परिणाम शिक्षा, रोजगार आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित राज्य स्तरीय नीतियों पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

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