Sambhal में मिला 46 साल पुराना मंदिर, 1978 के दंगों के बाद था बंद, CM Yogi का बयान आया सामने

By एकता | Dec 15, 2024

उत्तर प्रदेश के संभल में 46 साल पुराने मंदिर के मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान आया है। सीएम योगी ने एक कार्यक्रम में इस मुद्दे को उठाया और सवाल किया कि संभल में इतना प्राचीन मंदिर क्या रातों-रात प्रशासन ने बना दिया? क्या वहां बजरंगबली की इतनी प्राचीन मूर्ति रातों-रात आ गई? सीएम योगी ने सवाल पूछा कि उन दरिंदों को आज तक सजा क्यों नहीं मिली, जिन्होंने 46 वर्ष पहले संभल में नरसंहार किया था? इस पर चर्चा क्यों नहीं होती है?


 

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बता दें, जिला प्रशासन द्वारा संभल में अतिक्रमण और बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत अधिकारियों को शनिवार को यह मंदिर मिला। अधिकारियों को मंदिर में एक शिवलिंग और हनुमान की एक मूर्ति भी मिली। स्थानीय लोगों का दावा है कि 1978 में सांप्रदायिक दंगों के बाद हिंदू समुदाय के सदस्यों के यहां से पलायन करने के बाद से ही यह मंदिर बंद था।


अभियान का नेतृत्व कर रहीं उप जिलाधिकारी वंदना मिश्रा ने कहा, 'क्षेत्र का निरीक्षण करते समय, हम अचानक इस मंदिर में पहुंचे। इसके बाद मैंने तुरंत जिले के अधिकारियों को सूचित किया। फिर हमने मंदिर को फिर से खोलने का फैसला किया।' उन्होंने आगे बताया कि स्थानीय निवासियों ने पुष्टि की है कि यह मंदिर 1978 से बंद था। उन्होंने बताया कि मंदिर के पास एक कुआं भी है और अधिकारी उसके जीर्णोद्धार की योजना बना रहे हैं।

 

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संभल जिले के कोट गर्वी के निवासी मुकेश रस्तोगी ने कहा, 'हमने हमारे पुरखों से इस मंदिर के बारे में काफी कुछ सुना था। यह एक प्राचीन मंदिर है, लेकिन यह लंबे समय से बंद था। चूंकि एक वर्ग विशेष समुदाय के लोग वहां रहते हैं, इस वजह से वह मंदिर बंद पड़ा था।” उन्होंने कहा कि 1978 में संभल में हुए दंगों के बाद से यह मंदिर बंद रहा है, हमने सुना है कि यह कम से कम 500 साल पुराना होगा।'


नगर हिंदू महासभा के 82 वर्षीय संरक्षक विष्णु शंकर रस्तोगी ने कहा, मैं अपने जन्म से ही खग्गू सराय में रहता हूं। वर्ष 1978 के दंगों के बाद, हमारे समुदाय के लोगों को इस क्षेत्र से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हमारे कुलगुरु को समर्पित यह मंदिर तब से बंद है।' उन्होंने आगे बताया कि खग्गू सराय में भी हमारा घर हुआ करता था। करीब 25-30 हिंदू परिवार वहां रहते थे। 1978 के दंगों के बाद हमने मकान बेच दिए और वह जगह छोड़ दी। यह बहुत प्राचीन मंदिर है और इसे रस्तोगी समुदाय का मंदिर कहा जाता था। पहले हमारे समुदाय के लोग यहां पूजा करने आते थे।

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