Health Tips: बड़ी आंत में संक्रमण से होता है Diverticulitis, पेट दर्द और बुखार को न करें इग्नोर

By अनन्या मिश्रा | Sep 12, 2026

पेट के निचले बाईं ओर लगातार होने वाले दर्द को सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। हालांकि कई बार यह दर्द सामान्य गैस, मांसपेशियों में खिंचाव या कब्ज की वजह से हो सकती है। लेकिन लगातार यह दर्द रहने से या दर्द तेज होने से और इसके साथ कब्ज, मतली, फीवर और दस्त आदि के लक्षण दिखते हैं, तो यह डाइवर्टिकुलाइटिस का संकेत भी हो सकता है। डाइवर्टिकुलाइटिस बड़ी आंत की दीवार में बनी छोटी थैलियों में सूजन या फिर संक्रमण से होने वाली स्थिति होती है, जिसका समय रहते इलाज होना जरूरी होता है।

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कैसे करें डाइवर्टिकुलाइटिस की पहचान

बता दें कि डाइवर्टिकुलाइटिस तब होता है, जब बड़ी आंत में मौजूद छोटी थैलियों में संक्रमण या सूजन हो जाती है। अक्सर यह समस्या सिग्मॉइड कोलन में होती है। जोकि पेट के बाएं ओर होता है। यही कारण है कि दर्द ज्यादातर पेट के निचले बाएं हिस्से में महसूस होता है।

वहीं अगर लगातार दर्द बना रहता है, दबाने पर दर्द बढ़ता है और साथ ही फीवर लगता है, तो डॉक्टर डाइवर्टिकुलाइटिस की संभावना की जांच कर सकते हैं।

जानें डाइवर्टिकुलाइटिस, IBS और किडनी स्टोन में अंतर

डाइवर्टिकुलाइटिस होने पर कब्ज, दस्त, बुखार और पेट में सूजन की समस्या हो सकती है। इसमें लगातार और एक ही जगह पर विशेषकर बाईं ओर दर्द बना रहता है।

IBS यानी की इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या होने पर पेट फूलना, गैस, मल त्याग के बाद राहत और रुक-रुक कर दर्द हो सकता है।

किडनी की स्टोन होने पर इसके लक्षणों में पेशाब में खून, जलन, कमर से लेकर पेट तक दर्द और अचानक से शुरू होने वाला तेज और वेवी दर्द होता है।

अगर दर्द के अलावा पेशाब संबंधी लक्षण हों, तो किडनी स्टोन होने की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं सिर्फ मल त्याग के बाद राहत मिलने वाला दर्द IBS में देखा जाता है।

किन लोगों में डाइवर्टिकुलाइटिस का अधिक खतरा

50 वर्ष या उससे अधिक उम्र
कम फाइबर वाली डाइट
धूम्रपान
मोटापा
फिजिकल एक्टिविटी की कमी
लंबे समय तक NSAIDs का अधिक इस्तेमाल

फैमिली में डाइवर्टिकुलर डिजीज का इतिहास

डाइवर्टिकुलर डिजीज को पहले बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन हाल ही के सालों में कम उम्र के लोगों में इसके मामले बढ़ रहे हैं।

डाइवर्टिकुलाइटिस का इलाज

हल्के मामलों में डॉक्टर आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ, कुछ समय के लिए लो-फाइबर डाइट और जरूरत के हिसाब से दवाएं देने की सलाह दे सकते हैं। अगर संक्रमण गंभीर हो, आंत में छेद हो जाए या फोड़ा बन जाए, तो हॉस्पिटल में एडमिट और कभी-कभी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। वहीं बिना डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द की दवा या एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए।

पेट के बाएं और निचले हिस्से में दर्द होना हमेशा कब्ज या सामान्य गैस का संकेत नहीं होता है। अगर लगातार दर्द बना रहता है, मतली, बुखार, कब्ज या दस्त भी आ रहे हों, तो यह डाइवर्टिकुलाइटिस जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। कई बार डाइवर्टिकुलाइटिस, IBS और किडनी स्टोन के लक्षण मिलते-जुलते लग सकते हैं। इसलिए सही जानकारी के लिए डॉक्टर से चेकअप जरूर करना चाहिए।

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