Global Supply Chain का भरोसेमंद साथी बनेगा भारत, Yashvir Singh ने Industry को दिया 5 सूत्रीय मंत्र

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 20, 2026

वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने उद्योग जगत से विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में देश की स्थिति मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने, मूल्यवर्धन पर ध्यान देने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने और निर्यात बाजारों में सक्रिय रूप से विविधता लाने को कहा है। सिंह ने कहा कि भारत ने जिन भी व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, ‘‘वे एक दरवाजा हैं लेकिन दरवाजे कितने भी शानदार ढंग से बनाए गए हों, वे खुद नहीं खुलते। उद्योग जगत को ही उनके जरिये आगे बढ़ना होगा।’’ उन्होंने कहा कि उद्योग को बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश एवं प्रौद्योगिकी आकर्षित करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और ऐसी विनिर्माण व्यवस्था तैयार करने के लिए एफटीए का इस्तेमाल करना चाहिए, जो वैश्विक झटकों का सामना कर सके।

सिंह ने कहा कि उद्योग को ‘‘मूल्य श्रृंखला से आगे बढ़ना’’ चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के निर्यात में पूंजीगत वस्तुओं की हिस्सेदारी 2014 में 13 प्रतिशत से बढ़कर अब 19 प्रतिशत हो गई है लेकिन इस दिशा में वृद्धि की रफ्तार और तेज करनी होगी। अतिरिक्त सचिव ने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने का भी आह्वान किया और कहा कि चीन में शुरुआती स्तर की सामग्रियों के प्रसंस्करण पर अधिक निर्भरता दुनिया के लिए जोखिम है। सिंह ने कहा, ‘‘भारत के लिए यह एक अवसर भी है। महत्वपूर्ण खनिजों, एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) विनिर्माण और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों में निवेश करें। हम जिस भी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करते हैं, उसकी कमजोर कड़ी को दूर करते हैं। चौथा, बाजारों में सक्रिय रूप से विविधता लाएं।’’

उन्होंने कहा कि ओमान, न्यूजीलैंड और मॉरीशस के साथ भारत के व्यापार समझौतों ने खाड़ी, ओशिनिया और पूर्वी अफ्रीका में ऐसे बाजारों के रास्ते खोले हैं जहां पहले तरजीही शर्तों पर पहुंच नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘‘पांचवां सुझाव है मानकों के निर्धारण में भाग लें। जो देश तकनीकी मानकों को निर्धारित करता है, वही बाजार पर नियंत्रण रखता है। भारत को मानकों का अनुयायी बनने से आगे बढ़कर उन्हें निर्धारित करने वाला देश बनना होगा। यूपीआई, ओएनडीसी और भारतनेट इस बात के शुरुआती संकेत हैं कि संप्रभु मानक क्या हासिल कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि अब उद्योग जगत को इसका विस्तार करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘आइए हम चीन प्लस वन न बनें। हम भारत बनें, एक भरोसेमंद भागीदार, मजबूत विनिर्माता और वैश्विक वृद्धि का अगला बड़ा इंजन।’’ वैश्विक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों पर प्रतिबंधों को हथियार बनाया जा रहा है, प्रौद्योगिकी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जानबूझकर अवरोध पैदा किए जा रहे हैं और व्यापार अब केवल आर्थिक साधन नहीं रह गया है।

सिंह ने कहा, ‘‘ यह भौगोलिक-राजनीतिक रणनीति का एक साधन बन गया है। इस बदलाव के परिणाम वैश्विक स्तर पर विनिर्माण और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं के एक जगह केंद्रित होने के रूप में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

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