पुलिस में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं योगी, कई शहरों में शुरू होगी कमिश्नर प्रणाली

By अजय कुमार | Jan 11, 2020

उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी यदि हमेशा की तरह आड़े नहीं आई तो प्रदेश में नई पुलिस कमिश्नर प्रणाली को योगी सरकार अमली जाना पहना सकती है। पुलिस कमिश्नर व्यवस्था को लेकर मंथन शुरू हो गया है। बीते दिनों जिस तरह से खाकी वर्दी वालों के दाग सामने आए हैं उसे धोने के लिए पुलिस कमिश्नर प्रणाली की चर्चा तेज हो गई है। यह प्रणाली देश के कई बड़े महानगरों में लागू है और अपराध को नियंत्रण के लिए काफी सफल भी रही है। वैसे, प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग नई नहीं है, लेकिन कई सरकारें आईं और चली गई परंतु ब्यूरोक्रेसी के दबाव में कभी इस व्यवस्था की शुरुआत नहीं हो पाई। पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में भी बढ़ते अपराधों से चिंतित पुलिस के कुछ अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई थी। तब तत्कालीन डीजीपी रिजवान अहमद की मांग पर उस समय के सीएम अखिलेश यादव ने तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमिटी का गठन भी किया था। हालांकि, इस कमेटी की एक भी बैठक ही नहीं हुई।

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ब्यूरोक्रेसी के चलते लम्बे समय से कमिश्नर प्रणाली का खाका खींचे जाने के बाद भी यह सिर्फ घोषणा ही बनकर रह गई। सूत्र बताते हैं कि पूर्व में कानपुर के पहले कमिश्नर के रूप में आईपीएस वासुदेव पंजानी का नाम तक तय हो गया था। तत्कालीन गृह सचिव कल्याण कुमार बख्शी और वासुदेव पंजानी को दूसरे राज्यों में लागू कमिश्नर सिस्टम के सर्वे के लिए भेजा भी गया था, लेकिन इस बीच आईएएस अफसरों ने विरोध कर दिया। इसके बाद इस प्रणाली को लागू करने के लिए तमाम प्रयास किए गए लेकिन यह व्यवस्था आज तक यूपी में शुरू नहीं हो पाई।

गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के एसएसपी पर कार्रवाई के साथ प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने की चर्चा एक बार फिर तेज है। कहा जा रहा है कि सरकार ने पुलिस कमिश्नर (सीपी) प्रणाली लागू करने के लिए प्रयोग के रूप में दो जिलों (गौतमबुद्धनगर और लखनऊ) को चुना है। इसलिए वैभव कृष्ण के निलंबन के बाद गौतमबुद्धनगर में और कलानिधि नैथानी को गाजियाबाद भेजे जाने के बाद खाली हुई लखनऊ एसएसपी की सीट पर किसी की तैनाती नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक सीएम पुलिस और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ कमिश्नर प्रणाली पर बात कर चुके हैं।

गौरतलब है कि पुलिस कमिश्नर प्रणाली में आईजी रैंक के अफसर को कमिश्नर के रूप में जिले की कमान सौंपी जाती है। दिसंबर 2018 में पुलिस परेड की सलामी लेने के बाद यूपी के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने भी आईपीएस एसोसिएशन की मांग का समर्थन करते हुए प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की पैरवी की थी। यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के मुताबिक आज से 42 साल पहले वर्ष 1976−77 में तत्कालीन सीएम ने कानपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन आईएएस अफसरों के विरोध के चलते इसे अमली जाना नहीं पहनाया जा सका था।

-अजय कुमार

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