नेता प्रतिपक्ष के पद से अधीर रंजन की हो सकती है छुट्टी ! राहुल का नाम सबसे आगे, मनीष तिवारी भी रेस में

By अनुराग गुप्ता | Jul 05, 2021

नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस में अब हलचलें तेज हो गईं हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस अब तृणमूल कांग्रेस के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा सकती है। ऐसे में पार्टी लोकसभा से नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी को पद से हटाकर इसकी शुरुआत कर सकती है। कांग्रेस पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहती थी लेकिन अधीर रंजन चौधरी को यह मंजूर नहीं था। ऐसे में पार्टी ने अधीर के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और जमानत तक जब्त हो गई। 

भले ही राहुल गांधी के नाम को सबसे आगे रखा गया हो लेकिन वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी चाहती हैं कि राहुल गांधी इस भूमिका को स्वीकार कर लें। रिपोर्ट्स में कांग्रेस नेताओं के हवाले से यह भी कहा गया कि राहुल गांधी अगर इस भूमिका को स्वीकार कर लेते हैं तो पार्टी अध्यक्ष का पद गांधी परिवार के बाहर किसी को भी मिल सकता है।

असंतुष्टों को मनाने की कवायद तेज!

पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए मनीष तिवारी के नाम पर भी मुहर लगा सकती हैं। आने वाले समय में पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर किसी भी तरह के अंर्तकलह को पनपने नहीं देना चाहती हैं। कहा जा रहा है कि असंतुष्ट नेताओं को मनाने के विचार से आला नेतृत्व मनीष तिवारी या फिर शशि थरूर को नेता प्रतिपक्ष की बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। 

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मनीष तिवारी पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी उनकी पकड़ है। ब्राह्मण होने के साथ-साथ मनीष तिवारी के रिश्ते ममता बनर्जी के साथ अच्छे हैं। जबकि तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर केरल की समस्याओं को लगातार उठाते हैं। मौजूदा समय में विदेशी मामलों में संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा से इस संबंध में जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली।

चौधरी से नाराज हैं कांग्रेस नेता

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने हाल ही में अधीर रंजन चौधरी को कमजोर नेता बताते हुए कहा था कि चुनावों में ममता के साथ गठबंधन करना चाहिए था। चौधरी पर निशाना साधते हुए मोइली ने कहा था कि वह जमीन से दूर हैं और उन्हें केवल ममता बनर्जी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाला नेता माना जाता है। इसे हमारे लोगों और कार्यकर्ताओं ने पसंद नहीं किया। यहां तक कि हमारे मजबूत गढ़ों में भी हमारे मतदाता ममता की ओर चले गये जहां परंपरागत रूप से कांग्रेस जीतती थी।

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