By जे. पी. शुक्ला | Feb 20, 2026
भारत में म्यूचुअल फंड को मुख्य रूप से स्ट्रक्चर, एसेट क्लास, इन्वेस्टमेंट के मकसद और रिस्क प्रोफ़ाइल के आधार पर बांटा जाता है। ये कैटेगरी इन्वेस्टर को ऐसी स्कीम चुनने में मदद करती हैं जो उनके फाइनेंशियल लक्ष्यों, लिक्विडिटी की ज़रूरतों और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से हों। मुख्य तरह के फंड में इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और मनी मार्केट फंड शामिल हैं।
म्यूचुअल फंड भारत के सबसे पसंदीदा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में से एक बन गए हैं, जो डाइवर्सिफिकेशन, प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट और कई तरह के एसेट क्लास तक आसान एक्सेस देते हैं। चाहे आप पहली बार इन्वेस्टर हों या लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो बना रहे हों, अलग-अलग तरह के म्यूचुअल फंड को समझने से आपको क्लैरिटी और कॉन्फिडेंस के साथ इन्वेस्ट करने में मदद मिलती है।
म्यूचुअल फंड एक इन्वेस्टमेंट का तरीका है जो कई इन्वेस्टर्स से पैसा इकट्ठा करके स्टॉक्स, बॉन्ड्स और दूसरी सिक्योरिटीज़ के अलग-अलग तरह के पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट करता है, जिसे प्रोफेशनल फंड मैनेजर मैनेज करते हैं। हर इन्वेस्टर के पास फंड की यूनिट्स या शेयर्स होते हैं और इन यूनिट्स की वैल्यू नेट एसेट वैल्यू (NAV) से पता चलती है, जो अंदरूनी इन्वेस्टमेंट्स के परफॉर्मेंस के आधार पर ऊपर-नीचे होती रहती है। इन्वेस्टर्स सीधे तौर पर अलग-अलग सिक्योरिटीज़ के मालिक नहीं होते; वे खुद फंड के शेयर्स के मालिक होते हैं।
आज के समय में म्यूचुअल फंड निवेश आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसमें छोटी रकम से भी लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना होती है। लेकिन निवेश से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं और आपके लिए कौन-सा सही है।
भारत में म्यूचुअल फंड को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड बाजार को नियंत्रित करता है और निवेशकों को जागरूक करने का काम Association of Mutual Funds in India करता है।
- पैसा मुख्य रूप से शेयर बाजार में लगाया जाता है।
- फायदे: : लंबे समय में अधिक रिटर्न की संभावना और महंगाई को मात देने में मददगार होता है ।
- जोखिम: बाजार गिरने पर नुकसान भी हो सकता है।
- किसके लिए सही: जो 5–10 साल या उससे ज्यादा निवेश कर सकते हैं और जोखिम उठाने की क्षमता रखते हैं।
- पैसा सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे सुरक्षित साधनों में लगाया जाता है
- फायदे:अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न।
- जोखिम: कम जोखिम और रिटर्न इक्विटी से कम होता है।
- किसके लिए सही: जो सुरक्षित निवेश चाहते हैं और कम समय के लक्ष्य वाले निवेशक हैं।
- इक्विटी + डेट दोनों में निवेश।
- फायदे: जोखिम और रिटर्न में संतुलन और कम उतार-चढ़ाव।
- किसके लिए सही: मध्यम जोखिम वाले निवेशक और पहली बार निवेश करने वाले लोग।
- किसी शेयर बाजार इंडेक्स को कॉपी करते हैं।
- फायदे: कम खर्च (Low Expense Ratio) और बाजार के औसत रिटर्न के करीब प्रदर्शन।
- जोखिम: बाजार गिरेगा तो फंड भी गिरेगा।
- किसके लिए सही: लंबी अवधि के धैर्यवान निवेशक।
- किसी खास सेक्टर में निवेश जैसे IT, बैंकिंग, फार्मा।
- फायदे: सही समय पर बड़ा मुनाफा।
- जोखिम: सेक्टर गिरा तो भारी नुकसान।
- किसके लिए सही: अनुभवी निवेशक।
1. अपने लक्ष्य तय करें
- घर खरीदना
- बच्चों की पढ़ाई
- रिटायरमेंट
- आपातकालीन फंड
- 1–3 साल - डेट फंड
- 3–5 साल - हाइब्रिड फंड
- 5+ साल - इक्विटी फंड
- कम जोखिम - डेट फंड
- मध्यम जोखिम - हाइब्रिड फंड
- अधिक जोखिम - इक्विटी फंड
SIP (Systematic Investment Plan) के फायदे:
- हर महीने छोटी रकम निवेश
- बाजार गिरे-चढ़े तो औसत लागत कम होती है
- आदत बनती है बचत की
- फंड मैनेजर का अनुभव
- खर्च अनुपात (Expense Ratio)
- जोखिम स्तर
- फंड का स्थायित्व
- बिना समझे किसी की सलाह पर पैसा न लगाएं
- ज्यादा रिटर्न के लालच में जोखिम भरे फंड न चुनें
- समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करें
- टैक्स प्रभाव को भी समझें
- जे. पी. शुक्ला