By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 25, 2026
कांग्रेस ने रविवार को उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर ‘‘गंभीर सवाल’’ उठाए और कहा कि संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रहना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट साझा की जिसमें कौल के संस्मरण ‘विदाउट फियर ऑफ फेवर’ की प्रकाशन-पूर्व पांडुलिपि का हवाला देते हुए कहा गया कि नियुक्तियों के मामले में पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ‘‘सरकार के प्रति कुछ ज्यादा ही विनम्र’’ थे। रमेश ने ‘एक्स’ पर अपने एक पोस्ट में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की किताब ने मोदी सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नियुक्तियों में सरकार की दखलंदाजी, कॉलेजियम की बैठक से पहले ही सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय के एक न्यायाधीश के नाम पर उनकी जाति को लेकर सरकार के बेतुके सवाल - न्यायमूर्ति कौल ने इन घटनाओं का जिक्र किया है।
लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता कोई विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।’’