By एकता | Jun 07, 2026
विपक्षी इंडिया गठबंधन के अंदरूनी हालात कुछ ठीक नहीं नजर आ रहे हैं। गठबंधन में शामिल कुछ बड़े राजनीतिक दलों के तेवर अचानक बदल गए हैं। सोमवार को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की एक बहुत अहम बैठक होने जा रही है, लेकिन इस मीटिंग से ठीक पहले ही विपक्षी दलों के बीच मतभेद की खबरें खुलकर सामने आने लगी हैं। डीएमके तो पहले से ही नाराज चल रही थी, अब सीपीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा के रुख ने भी कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है।
कांग्रेस के कामकाज को लेकर इतनी गंभीर आपत्तियों और कड़े विरोध के बाद भी सीपीएम ने एक बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने तय किया है कि वे नई दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की इस बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके लिए सीपीएम अपने राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास को इस मीटिंग में भेज रही है।
सीपीएम के ये कड़े तेवर ऐसे समय में सामने आए हैं जब डीएमके पहले ही इस बैठक का बायकॉट करने का एलान कर चुकी है। तमिलनाडु चुनाव के नतीजों के बाद जिस तरह से कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ दिया और टीवीके के साथ मिलकर सरकार बनाई, उससे डीएमके बेहद नाराज है। यही वजह है कि उन्होंने बैठक से दूरी बना ली है।
दूसरी तरफ, झारखंड मुक्ति मोर्चा भी कांग्रेस से काफी खफा है। जेएमएम की नाराजगी इस बात को लेकर है कि कांग्रेस ने झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार की घोषणा करने का फैसला अकेले ही ले लिया।
जेएमएम के सूत्रों की मानें तो पार्टी कांग्रेस के इस एकतरफा फैसले से इस कदर नाराज है कि उसने झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपना दूसरा उम्मीदवार उतारने तक की धमकी दे दी है।
विवाद सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। केरल में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने सीपीएम पर जो हमले किए थे, उससे लेफ्ट पार्टियां नाराज हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा को लेकर टीएमसी नेता ममता बनर्जी का समर्थन करने की गठबंधन की किसी भी कोशिश पर लेफ्ट को सख्त एतराज है। सीपीएम नेता बेबी ने खरगे को लिखे पत्र में साफ कहा है कि जब तक इन मुद्दों पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक गठबंधन का असली मकसद ही सवालों के घेरे में रहेगा।