By अंकित सिंह | Jul 20, 2026
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोमवार को अहम विधायी मामलों पर अपना रुख बदलने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की आलोचना की और कहा कि पार्टी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की सार्वजनिक जांच होनी चाहिए, जिसमें कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) द्वारा ऑडिट और संसदीय चर्चा शामिल हो। DMK के रुख पर बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि आपको DMK से ही पूछना होगा कि वे अपना स्टैंड क्यों बदल रहे हैं। मेरी राय में, उन्हें 'एक देश, एक चुनाव' (One Nation One Election) का लालच दिया जा रहा है। वे जल्द से जल्द एक और चुनाव कराने की जल्दी में हैं। लेकिन मैं बस इतना कह सकता हूं कि अगर DMK उस रास्ते पर चलती है, तो अगले चुनावों में उनका हाल हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों से भी बुरा होगा।
उन्होंने कहा कि कागज़ पर तो ऐसा लगता है कि सबको प्रतिशत के हिसाब से बराबर बढ़ोतरी मिल रही है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र में असल संख्या मायने रखती है। अभी तमिलनाडु और पुडुचेरी के पास 40 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश के पास 80 सीटें हैं। तो, तमिलनाडु, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश के बीच का अंतर 40 है। लेकिन अगर सीटों को 50% बढ़ाया जाए, तो तमिलनाडु और पुडुचेरी की सीटें 60 हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश की 120। ऐसे में अंतर 60 हो जाएगा। इसलिए, राजनीति में असल संख्या मायने रखती है। यह सिर्फ़ प्रतिशत की बात नहीं है, क्योंकि भारत के उत्तरी राज्यों की बराबरी करने के लिए दक्षिणी राज्यों को बहुत ज़्यादा काम करना होगा। दक्षिणी राज्यों की आबादी कम है और उन्होंने टैक्स में ज़्यादा योगदान दिया है, फिर भी लोकसभा में उनके सांसदों की संख्या कम हो जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से संसदीय बहसों की असरदारता कम हो जाएगी। चिदंबरम ने कहा कि इसके अलावा, सदन में 543 सदस्य होने पर भी हमें बोलने के लिए बहुत कम समय मिलता है। 815 सदस्य होने पर बोलने के लिए और भी कम समय मिलेगा। स्पीकर हम सभी के नाम नहीं जानते हैं, और जो 300 अतिरिक्त सदस्य आएंगे, उनके नाम तो उन्हें बिल्कुल पता नहीं होंगे। ऐसे में, सदन चीन की तरह बस एक 'स्टैम्पिंग हाउस' बनकर रह जाएगा... एक बड़ी संसद बेअसर संसद होगी।
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