By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 27, 2021
सिद्दिकी के संगठन की तुलना आजादी से पहले वाली ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और असम की एआईयूडीएफसे की जा रही है और माना जा रहा है कि इससे हिंदू मतों का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ेगा। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने गठबंधन के साझेदारों को एक दूसरे की ‘कठपुतली’ होने का आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि भगवा पक्ष आईएसएफ के चुनावी मैदान में उतरने से खुश है क्योंकि उसका मानना है कि इससे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की अल्पसंख्यक मतों पर पकड़ ढीली होगी। माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम ने कहा, ‘‘ हमें उम्मीद है कि यह गठबंधन बंगाल चुनाव की दिशा बदलने वाला होगा। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव को दो ध्रुवीय लड़ाई में तब्दील करना चाहते हैं लेकिन हमने इसे त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है। लोग राज्य में तृणमूल के और केंद्र में भाजपा के कुशासन से तंग आ चुके हैं।’’ कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य भी सलीम की बातों का समर्थन किया और भरोसा जताया कि गठबंधन के ‘उल्लेखनीय नतीजे’ आएंगे जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकेगा। सिद्दिकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘लोगों से मिल रही प्रतिक्रिया से हमें चुनाव जीतने का भरोसा है। हम चुनाव के बाद किंग मेकर की भूमिका में होंगे। कोई भी सरकार हमारे समर्थन के बिना नहीं बनेगी।’’ शुरुआत में सीटों को बंटवारे को लेकर खींचतान के बाद इस ‘सतरंगी गठबंधन’ में समझौत हो गया जिसके मुताबिक वाम दल 177, कांग्रेस 91 और आईएसएफ 26 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस एवं वाम दलों के सूत्रों के मुताबिक गठबंधन समय की मांग थी, क्योंकि दोनों पार्टियों ने 2016 विधानसभा चुनाव साथ लड़ा था और उन्हें कुल 36 प्रतिशत मत मिले थे जिसमें अगले तीन साल में भारी कमी आई। उन्होंने बताया कि अलग-अलग लड़ने की वजह से वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में कांग्रेस एवं वाम को क्रमश: सात एवं पांच प्रतिशत मत मिले। लोकसभा चुनाव में वाम दल खाता भी नहीं खोल सके जबकि कांग्रेस 42 में से महज दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। वहीं तृणमूल ने 22 और भाजपा ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की।
आईएसएफ अध्यक्ष नौशाद सिद्दिकी ने कहा, ‘‘हम सांप्रदायिक पार्टी नहीं है। हम धर्मनिरपेक्ष पार्टी है जो राज्य के पिछड़े समुदायों की लड़ाई लड रही है। हम दर्शक दीर्घा में लंबे समय तक बैठ नहीं सकते बल्कि मैदान में उतरना चाहते हैं।’’ हालांकि, अब्बास के पूर्व में दिए बयान आईएसएफ को असहज कर रहे हैं। भाजपा ने आईएसएफ को दोबारा बंगाल को बांटने के लिए आए मुस्लिम लीग का उत्तराधिकारी करार दिया है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा का मानना है कि वाम दलों ने सांप्रदायिक शक्तियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है। तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘वाम दल ने धर्मनिरपेक्ष होने की अपनी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। इससे भाजपा के इस कथन को बल मिलेगा कि अन्य पार्टियां मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर रही हैं औरइससे हिंदू मत और एकजुट होंगे। राज्य ने पहले कभी मुस्लिम पार्टी नहीं देखी।’’ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ‘‘यह सतरंगी गठबंधन राजनीतिक प्रासंगिकता और अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। तृणमूल कांग्रेस मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर रही है जबकि आईएसएफ एवं उसके सहयोगी अल्पसंख्यकों को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में हिंदुओं की रक्षा कौन करेगा?एकमात्र भाजपा तुष्टिकरण के खिलाफ है।’’ राजनीतिक विश्लेषक बिश्वंत चक्रवर्ती का मानना है कि इस गठबंधन से कम से कम 30 सीटों पर भाजपा एवं तृणमूल कांग्रेस के चुनाव पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अल्पसंख्यक बहुल जिलों में गठबंधन के प्रत्याशी खासतौर पर आईएसएफ के प्रत्याशी तृणमूल के मतों में सेंध लगाएंगे जबकि उत्तरी एवं दक्षिणी बंगाल में भाजपा की सीटें इससे प्रभावित होंगी।