By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 25, 2026
हरियाणा में कांग्रेस के प्रभारी संजय दत्त और पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा देश के लोकतंत्र से जुड़े बुनियादी मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मामलों में किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करेगी।
रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली को निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ ‘दिल्ली चलो’ मार्च के समापन के रूप में पेश किया गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि कम से कम 10 लाख लोग ‘वोट चोरी’ के खिलाफ मार्च में शामिल होंगे। पार्टी ने कहा कि इससे ‘लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुटता’ का मजबूत संदेश जाएगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दत्त ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका और सामने आई विसंगतियों से जुड़ी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। दत्त और सिंह ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे, तब तक चुनाव प्रक्रिया की कथित निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का पर्याप्त समाधान नहीं हो सकता।
इसलिए उन्हें पद से हटाना जरूरी है। दत्त ने बताया कि शुक्रवार को कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने नयी दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस की हरियाणा इकाई के नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में रैली की तैयारियों की समीक्षा की गई।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली को लेकर शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधा और इस कदम को बेहद असंवेदनशील तथा सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला बताया। ढिल्लों ने कहा कि सिखों के लिए एक नवंबर कोई सामान्य तारीख नहीं, बल्कि शोक और स्मरण का दिन है। उन्होंने कहा, “वर्ष 1984 में सिख-विरोधी हिंसा के दौरान सिखों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया और दिल्ली की सड़कों पर उनकी हत्या की गई।
गुरुद्वारों में आग लगा दी गई और अनगिनत परिवार तबाह हो गए। दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में हजारों सिखों ने अपनी जान गंवाई।” ढिल्लों ने आरोप लगाया कि सिखों से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस का रिकॉर्ड बेहद चिंताजनक रहा है। उन्होंने इसके लिए “दरबार साहिब पर हमला, श्री अकाल तख्त साहिब को पहुंचाया गया नुकसान और नवंबर 1984 में दिल्ली तथा अन्य शहरों में हुई सिख विरोधी हिंसा” का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि एक नवंबर को ‘राजनीतिक रैली’ आयोजित करना सिख समुदाय के दर्द और उसकी यादों के प्रति विशेष रूप से असंवेदनशील है। गौरतलब है कि 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे।