By अजय कुमार | Apr 09, 2024
उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन का प्रचार अभियान तेज नहीं पकड़ पा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने समस्या यह है कि वह अपनी चुनावी लाईन ही नहीं तय कर पा रही है। वहीं कांग्रेस आलाकमान ने यूपी को तो मानो भूला ही दिया है। संभवता कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार यह मान बैठा है कि यूपी में उसका सियासी सफरनामा सपा के कंधे पर बैठकर पूरा हो जायेगा। इंडी गठबंधन के तहत यूपी में कांग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 20219 के लोकसभा चुनाव में यूपी में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2.33 प्रतिशत और सीट मात्र रायबरेली की एक थी। जहां से सोनिया गांधी सांसद थीं, अब वह राज्यसभा की सदस्य हैं। रायबरेली से कांग्रेस सोनिया गांधी की जगह नया प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। इंडी गठबंधन के कमजोर प्रचार अभियान और बीजेपी के युद्ध स्तर पर चुनाव प्रचार करने से फिलहाल ऐसा लग रहा है कि बीजेपी ने प्रचार के माध्यम से काफी बढ़त बना ली है। 04 जून को मतगणना वाले दिन पता चलेगा बीजेपी की मेहनत कितनी रंग लाई, लेकिन कई सीटों पर मुकाबला कांटे का दिखाई दे रहा है। बीजेपी भी हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। वहीं सपा-कांग्रेस भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। हालांकि अमेठी, रायबरेली, बदायूं, घोषी, आजमगढ़, रामपुर समेत करीब दो दर्जन सीटों पर मुकाबला रोमाचंक होने वाला है। जीत-हार का आंकलन कर पाना किसी भी राजनीतिक पंडित के लिए आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर कांग्रेस की सुस्ती से समाजवादी पार्टी का प्रचार अभियान भी तेजी नहीं पकड़ पा रहा है जबकि पहले चरण के मतदान में अब मात्र दस दिनों का ही समय बचा है। कांग्रेस के रवैये के चलते सपा के कई दिग्गज नेता कांग्रेस आलाकमान से नाराज भी चल रहे हैं,इन नेताओं का कहना है कि कांग्रेस, सपा की पीठ पर सवार होकर पार करना चाहती है चुनावी वैतणनी।
तीसरे नंबर पर मैनपुरी लोकसभा सीट है। सपा का गढ़ मानी जाने वाली मैनपुरी सीट पर अगर बीजेपी नेताजी मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को टिकट देती है तो उस स्थिति में चुनाव कांटे का होने की संभावना है। वरना इस सीट पर हुए उप-चुनाव के नतीजों से साफ-साफ संकेत है कि इस बार भी नतीजे सपा के पक्ष में आएंगे। डिंपल यादव आसानी से चुनाव जीत जाएंगी। अपर्णा चुनाव लड़ी तो लड़ाई बेहद रोमाचंक होगी, उस स्थिति में जीत हार का आंकलन कर पाना बहुत मुश्किल होगा। ऐसे ही कन्नौज सीट से सपा मुखिया अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने पर ही मुकाबला जैसी स्थिति होगी। वरना बीजेपी के सुब्रत पाठक कमल खिला देंगे। अखिलेश के लड़ने पर सुब्रत पाठक के लिए चुनाव जीतना लोहे के चने चबाने जैसा होगा।
बदायूं सीट पर भी इस बार कड़ा मुकाबला होने के आसार है। सपा ने कद्दावर नेता शिवपाल यादव को टिकट दिया था, लेकिन अब बदायूं से उनकी जगह उनके पुत्र आदित्य के चुनाव लड़ने की चर्चा है। जबकि बीजेपी ने मौजूदा सांसद संघमित्रा मौर्य का टिकट काट दिया है। इस बार बीजेपी के दुर्विजय शाक्य की टक्कर यादव कुनबे से होगी। अगर आदित्य चुनाव लड़े तो उस स्थिति में बदायूं सीट पर रोमांचक मुकाबला होगा। आखिरी समय तक कुछ भी कह पाना संभव नहीं होगा। उधर घोषी सीट पर भी मुकाबला करो या मरो वाला होने वाला है। वहीं आजमगढ़ सीट पर भी सपा ने धर्मेंद्र यादव को उतार कर दिनेश लाल निरहुआ को कड़ी टक्कर दे दी है। सपा का गढ़ रही इस सीट पर भी कांटे की टक्कर हो सकती है।