भारत व पांच मध्य एशियाई देशों ने अफगानिस्तान पर संयुक्त कार्य समूह का गठन किया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 28, 2022

नयी दिल्ली|  भारत और पांच मध्य एशियाई देशों ने बृहस्पतिवार को अपने पहले सम्मेलन में अफगानिस्तान पर संयुक्त कार्य समूह के गठन का निर्णय लिया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भारत और मध्य एशिया के बीच सहयोग आवश्यक है और अफगानिस्तान के मद्देनजर मौजूदा वक्त में यह और जरूरी हो गया है।

सम्मेलन में कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जुमरात तोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमामअली रहमान, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्दीमुहम्मदेवो और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्र जापारोप ने भाग लिया।

सम्मेलन के बाद नेताओं ने ‘दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया और ‘आतंकवाद मुक्त विश्व’ बनाने के लिए आतंकवाद के खिलाफ मिलजुल कर लड़ने पर राजी हुए।

इस पर जोर देते हुए कि मध्य एशिया ‘समेकित और स्थिर पड़ोस के भारत के दृष्टिकोण का मुख्य बिन्दु है’ प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय संपर्क और अगले 30 साल तक सहयोग बनाए रखने की बात कही ताकि सम्मेलन के तीन मुख्य लक्ष्य प्राप्त हो सकें। सम्मेलन, से दो दिन पहले चीन ने मध्य एशियाई देशों के साथ अलग से बैठक की थी। यह पूछने पर कि क्या बैठक में चीन पर भी चर्चा हुई, विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) रीनत संधू ने कहा, ‘‘मध्य एशियाई देशों के साथ भारत की पुरानी मित्रता ऐतिहासिक संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी मजबूत नींव पर आधारित है। वे अपने गुणों के कारण इस रूप में हैं।

सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य भारत-मध्य एशिया साझेदारी को और मजूबत बनाना है।’’ यह पूछने पर कि क्या यूक्रेन के मुद्दे पर चर्चा हुई, संधू ने ‘ना’ में जवाब दिया। दोनों पक्षों ने संपर्क को लेकर सहयोग बढ़ाने की बात कही और मध्य एशियाई देशों ने चाबहार बंदरगाह पर संयुक्त कार्य समूह गठित करने के भारत के प्रस्ताव का स्वागत किया।

यह प्रस्ताव भारत और मध्य एशिया देशों के बीच उत्पादों के मुक्त आवागमन से जुड़ा हुआ है। संधू ने कहा कि सम्मेलन में नेताओं के बीच अफगानिस्तान पर करीबी सलाह-मशविरा जारी रखने पर सहमति बनी और उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर संयुक्त कार्य समूह गठित करने का फैसला लिया।

संयुक्त बयान के अनुसार, सम्मेलन के दौरान नेताओं ने अफगानिस्तान में मौजूदा हालात और क्षेत्र की स्थिरता तथा सुरक्षा पर उसके प्रभाव पर चर्चा की। बयान के अनुसार नेताओं ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों और संबंधित सभी पहलुओं की आलोचना की।

उन्होंने दोहराया कि आतंकवादियों का साथ देना, सीमापार आतंकवाद के लिए आतंकवादी ‘प्रॉक्सी’ का इस्तेमाल करना, आतंक वित्त्तपोषण, हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी, कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देना और गलत सूचना फैलाने तथा हिंसा भड़काने के लिए साइबर स्पेस का उपयोग करना मानवता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

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