गुलामी के प्रतीक से देश हुआ आजाद, पीएम मोदी ने किया कर्तव्य पथ का उद्घाटन, बोले- नए इतिहास का हुआ सृजन

By अंकित सिंह | Sep 08, 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के इंडिया गेट के पास कर्तव्य पथ का उद्घाटन किया है। कर्तव्य पथ पहले राजपथ के तौर पर जाना जाता था। हालांकि ने भारत में ऐसे कर्तव्य पथ का नया नाम दिया गया है। दावा किया जा रहा है कि कर्तव्य पथ आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर को पूरी दुनिया के सामने पेश करेगा। इस अवसर पर पूरा कर्तव्य पथ दूधिया रोशनी से नहा रहा था। उद्घाटन समारोह के दौरान कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम से सभी देशवासी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में देश को आज एक नई प्रेरणा, नई ऊर्जा मिली है। आज हम गुजरे हुए कल को छोड़कर आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज जो हर तरफ ये नई आभा दिख रही है, वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है। 

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नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर आजादी के बाद हमारा भारत सुभाष बाबू की राह पर चला होता तो आज देश कितनी ऊंचाइयों पर होता! लेकिन दुर्भाग्य से, आजादी के बाद हमारे इस महानायक को भुला दिया गया। उनके विचारों को, उनसे जुड़े प्रतीकों तक को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि नेता जी कल्पना की थी कि लाल किले पर तिरंगा फहराने की क्या अनुभूति होगी। इस अनुभूति का साक्षात्कार मैंने स्वयं किया, जब मुझे आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला। मोदी ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश ने अपने लिए 'पंच प्राणों' का विजन रखा है। इन पंच प्राणों में विकास के बड़े लक्ष्यों का संकल्प है, कर्तव्यों की प्रेरणा है। इसमें गुलामी की मानसिकता के त्याग का आहृवान है। अपनी विरासत पर गर्व का बोध है।

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अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि आज भारत के आदर्श अपने हैं, आयाम अपने हैं। आज भारत के संकल्प अपने हैं, लक्ष्य अपने हैं। आज हमारे पथ अपने हैं, प्रतीक अपने हैं। उन्होंने कहा कि आज अगर राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्यपथ बना है, आज अगर जॉर्ज पंचम की मूर्ति के निशान को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है, तो ये गुलामी की मानसिकता के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है। ये न शुरुआत है, न अंत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदल चुका है। भारतीय बजट, जो इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसका समय और तारीख भी बदली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आजाद किया जा रहा है।

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मोदी ने कहा कि कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है। ये भारत के लोकतांत्रिक अतीत और सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है। उन्होंने कहा कि अगर पथ ही राजपथ हो, तो यात्रा लोकमुखी कैसे होगी? राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। राजपथ की भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, उसकी संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी। आज इसका आर्किटेक्चर भी बदला है, और इसकी आत्मा भी बदली है। मोदी ने कहा कि आज के इस अवसर पर, मैं अपने उन श्रमिक साथियों का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने कर्तव्यपथ को केवल बनाया ही नहीं है, बल्कि अपने श्रम की पराकाष्ठा से देश को कर्तव्य पथ दिखाया भी है। 

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