CPEC फेल, 4 देशों वाला भारत का पहला 1300 KM सुपर कॉरिडोर

By अभिनय आकाश | Jun 06, 2026

बीजिंग के दफ्तरों में इस वक्त सन्नाटा पसरा है। वजह है भारत का वो साइलेंट मास्टर स्ट्रोक जिसने साउथ एशिया के नक्शे से चीन के दबदबे को मिटाने की पटकथा लिख दी है। दरअसल साउथ एशिया के सीने पर भारत एक ऐसी 1300 किमी लंबी आर्थिक तलवार चला रहा है जिससे चीन केत्वाकांक्षी सीपीईसी के गुब्बारे की हवा निकल चुकी है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं है। यह भारत का वो ब्रह्मास्त्र है जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की किस्मत को हमेशा हमेशा के लिए दिल्ली से जोड़ देगा और डिफेंस एक्सपर्ट भी हैरान है कि इतनी खामोशी से बिना किसी शोर के भारत ने चीन की घेराबंदी आखिर कैसे कर दी। भारत के उत्तरपूर्वी राज्य यानी नॉर्थ ईस्ट दशकों से कनेक्टिविटी की समस्या से जूझ रहे थे। 

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चीन इन्हें तिब्बत के रास्ते वोट देने का लालच देता रहा है। लेकिन हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों के कारण वो रास्ता बेहद महंगा और मुश्किल है। भारत ने इस 1300 किमी लंबे हाईवे के जरिए उन्हें एक ऐसा विकल्प दे दिया है जिसे ठुकराना उनके लिए नामुमकिन है। नेपाल और भूटान के व्यापारियों के लिए अब कोलकाता और हदिया फोर्ट तक पहुंचना मक्खन जैसा हो जाएगा। जब इन देशों का व्यापार भारत के रास्ते सस्ता होगा तो वे चीन के महंगे और एहसान भरे रास्तों की तरफ नहीं देखेंगे। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सबसे बड़ी जीत है और चीन की सबसे बड़ी हार है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ आता है बांग्लादेश पर। इस प्रोजेक्ट को बीबीआईए कहा गया जिसमें बांग्लादेश एक प्रमुख भागीदार था। 

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