नई साहित्यिक परिषद का निर्माण (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Aug 11, 2021

फोन नंबर अनजान होने के कारण काट रहा था मगर कॉल बार बार आ रही थी। मैंने फोन सुन ही लिया तो आवाज़ ने पूछा, पहचाना नहीं ? मैं विलासपुर से खुशहालसिंह बोल रहा हूं। हैप्पी न्यू टाइम्स, यार। पहचानने की कोशिश करते हुए कहा, खुशहालजी इतने महीने बाद। बोले, न्यू इयर पर बात नहीं हुई तो अब न्यू टाइम्स सही, हमने नए माहौल में मिलजुल कर, ‘न्यू निराला साहित्यिक फार्म’ बनाया है। मैंने हंसकर पूछा इस फार्म में कविताएं, कहानियां उगाओगे या बैंगन आलू। खुशहालसिंह ने ग़लती संभालते हुए कहा, अरे नहीं यार, ‘लिटरेरी फोरम’ का निर्माण किया है। मीटिंग में काफी लोग चायशाय पीते हुए डिस्कस कर रहे हैं, आपके एरिया में और कोई मान नहीं रहा है इसलिए आप हमारे रिप्रेज़ेनटेटिव बन जाएं। मैंने कहा, पत्नी की अनुमति बिना यह साहित्यिक काम नहीं कर सकता।

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सोचा, पूछ तो लूं क्या खुशहाली लाने वाले हैं साहित्य के क्षेत्र में। बोले, स्टेट प्रेज़ीडेंट मुझे बनना ही पड़ा क्यूंकि कोई और तैयार नहीं हुआ। पहले फार्म, सॉरी फोरम को रजिस्टर्ड करवाने के लिए ऐसा डैमोक्रेटिक संविधान बनाऊंगा ताकि फयूचर में मेरे लिए कोई पंगा न हो। बड़े, जानेमाने और पहचान के लोगों को इसका संरक्षक रखूंगा। कहां कहां से आर्थिक सहयोग मिल सकता है इसकी गहरी प्लानिंग करूंगा। सहयोग राशि लेकर सम्मान समारोह करूंगा। कई साहित्यिक मित्र जो बरसों से सम्मानित होने की इच्छा में जीवित हैं के घर तक सम्मान पहुंचा दूंगा। मुझे अपना ख़्वाब आने लगा जिसमें पत्नी प्रसन्न होती दिखी।

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खुशहाल साहित्यिक अभियान जारी था। बोले जिस स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं वहां प्रतियोगिताएं करवाकर अपने व जान पहचान वालों के बच्चों को अपनी पसंद के जजों से पुरस्कार दिलवाउंगा। अपनी पत्नी को क्रार्यक्रम की मुख्य अतिथि बनाउंगा। एक दिन मासिक लिटरेरी मैगज़ीन भी निकालूंगा। मनपसंद मंत्रीजी को उनके जन्मदिन पर मैगज़ीन कार्यालय में आमंत्रित कर केक काटूंगा और उस समारोह की रंगीन रिर्पोट छापूंगा ताकि मुझे...। विज्ञापन मिलते रहें, मैंने कहा। फिर क्या हो गया यार, इतने लोग हैं जो किसी न किसी बहाने लाखों करोड़ों डकार रहे हैं अपने फार्म सॉरी फोरम के बहाने मैं भी चुग लूंगा तो...? साहित्य भी तो एनजीओ हो सकता है यानी ‘नॉन घाटा आर्गेनाइज़ेशन’, खुशहाल ने सही जवाब दिया। जिन ख़ास बंदों को पहली सम्मान सूची में रखा है उनमें आप का नाम टॉप पर है। आप हमारे फार्म..... सॉरी यार, पता नहीं क्यूं बारबार फोरम की जगह यह फार्म क्यूं मुंह से निकल रहा है। 

आप को कॉलबैक करता हूं, मैंने कहा। सम्मान मिलने की खुशखबर सुनकर मुझे लगा थोड़ा लिटरेरी हो जाने में कोई हर्ज़ नहीं, इससे पत्नी का रूतबा भी तो बढ़ जाने वाला है। पत्नी के हां कहने पर मैंने खुशहालजी को खुश कर दिया।

- संतोष उत्सुक

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