Chabahar Port Crisis | चाबहार पोर्ट पर संकट टालने की कोशिश! 26 अप्रैल की समयसीमा से पहले अमेरिका से प्रतिबंधों में छूट मांग रहा है भारत

By रेनू तिवारी | Jan 17, 2026

भारत और ईरान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को बड़ी जानकारी साझा की है। भारत सरकार ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत इस परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट पाने के लिए वाशिंगटन के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिससे सिस्तान-बलूचिस्तान में ईरान के दक्षिणी तट पर रणनीतिक रूप से स्थित चाबहार पोर्ट के विकास में भारत की भूमिका को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

अपने हितों की रक्षा के लिए भारत के कदम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें प्रोजेक्ट में सीधे जोखिम को कम करने के लिए अपने तय $120 मिलियन को ट्रांसफर करना शामिल है। एक और संभावना जिस पर चर्चा हो रही है, वह है चाबहार के विकास को जारी रखने के लिए एक नई इकाई बनाना, जबकि भारतीय सरकार के लिए जोखिम को कम से कम किया जाए।

भारत इस प्रोजेक्ट के प्रति प्रतिबद्ध है क्योंकि यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में इसकी संभावित भूमिका है, जो भारत, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला 7,200 किलोमीटर का ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है।

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पिछले साल ईरान के साथ भारत का दो-तरफ़ा व्यापार $1.6 बिलियन था, जिसमें $1.2 बिलियन का निर्यात और $0.4 बिलियन का आयात शामिल था। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद, सरकारी सूत्रों ने कहा कि नए टैरिफ का भारत के व्यापार पर बहुत कम असर पड़ने की उम्मीद है।

ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

विदेश मंत्रालय ईरान में स्थिति पर करीब से नज़र रख रहा है, जहाँ सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शनों में 2,500 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई है।

भारतीयों के लिए एडवाइजरी

चाबहार पर बातचीत के बीच, ईरान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं:

यात्रा न करने की सलाह: MEA ने भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा करने से बचने की सलाह दी है।

देश छोड़ने का निर्देश: जो भारतीय नागरिक पहले से ईरान में हैं (लगभग 9,000 लोग, जिनमें छात्र और पेशेवर शामिल हैं), उन्हें उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों के माध्यम से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने को कहा गया है।

ट्रंप प्रशासन का प्रभाव: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद भारत के लिए यह 'डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग' काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

फिलहाल, लगभग 9,000 भारतीय, जिनमें ज़्यादातर छात्र हैं, ईरान में रहते हैं। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है और वहाँ रहने वालों से उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने का आग्रह किया है। जायसवाल ने ज़ोर देकर कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में है।

ईरान में अशांति ईरानी मुद्रा में गिरावट के बाद शुरू हुई, जो आर्थिक शिकायतों से राजनीतिक बदलाव की मांगों में बदल गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी रखती है तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

भारत के लिए चाबहार न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 26 अप्रैल 2026 की समयसीमा से पहले भारत का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्थायी कूटनीतिक समाधान निकालना है जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा टल जाए और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बाधित न हो।

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