क्राउडफंडिंग से मिला जुड़वा बच्चो को नया जीवन, शादी के 10 साल बाद गूंजी किलकारी

By सुयश भट्ट | Feb 07, 2022

भोपाल। मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ जिले से कोशिशों के जरिए जीवन देने वाली एक खबर सामने आई है।यह खबर जिले के रहने वाले मोहित नामदेव और उनकी पत्नी मीना नामदेव की है। शादी के लगभग दस साल बाद बच्चे की आस लगाए नामदेव परिवार की खुशियों का ठिकाना उस वक्त नहीं रहा जब उनको एक साथ जुड़वा बच्चे हुए।

दरअसल भोपाल के बंसल हॉस्पिटल में IVF के जरिए हुए जुड़वा बच्चों को जन्म के समय कम वजन के चलते उनको आईसीयू में रखा गया है। छोटी सी दुकान के सहारे अपने परिवार का खर्चा चलाने वाले मोहित नामदेव के सामने अस्पताल का खर्च उठाना बस की बात नहीं थी। जिसके बाद उनकी मदद के लिए आगे आई बंसल हॉस्टिपल की डॉ प्रिया भावे चित्तावार।

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आपको बता दें कि मोहित नामदेव ने कहा कि डॉ प्रिया भावे चित्तावार उनके लिए भगवान के समान है। और साथ ही उन्होंने क्राउडफंडिग के जरिए उनके जुड़वा बच्चों के इलाज के लिए देखते ही देखते करीब 2 लाख रुपए का इंतजाम कर दिया। डॉ प्रिया भावे की इस कोशिश के बाद आज उनके जुड़वा बच्चे पूरी तरह स्वस्थ है। हालांकि अभी भी बच्चों के कम वजन को देखते हुए उन्हें अस्पताल में ही रखा गया है।

वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ प्रिया भावे चित्तावार ने कहा कि मीना नामदेव जिन्होंने लंबी कोशिशों के बाद एक साथ जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद कम वजन और अन्य कारणों से बच्चों को पीलिया हो गया था और उन्हें अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में रखा पड़ा।

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डॉ प्रिया भावे चित्तावार ने कहा कि शादी के दस साल बाद मीना नामदेव एंडोमेट्रियोसिस नाम की बीमारी के कारण गर्भधारण करने की सारी उम्मीदें खो दी थीं। हर ओर निराश होकर वह बंसल हॉस्पिटल में इलाज के लिए आई जहां पहले एंडोमेट्रियोसिस और फिर आईवीएफ तकनीक के जरिए उनका इलाज किया गया।

इस बीच पांच महीने में प्रीटर्म लेबर में चली गई और बड़ी मुश्किल से गर्भावस्था को जारी रखने के लिए सर्वाइकल सिलाई नामक एक और प्रक्रिया चली। जिसके बाद कई विषम परिस्थितियों से जूझते हुए मीना नामदेव ने जुड़वा लड़का और लड़की जन्म दिया। जिसमें लड़की का वजन मात्र एक किलो था।

जानकारी मिली है कि अब दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ है। हर नए दिन के साथ दोनों बच्चों के स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार हो रहा है। नामदेव परिवार की मदद करने वाले हर व्यक्ति का धन्यवाद करते हुए कहती हैं कि ऐसी स्थिति में प्रत्येक छोटी मदद भी मायने रखती है। और इसके लिए वह व्यक्तिगत तौर पर मदद करने वालों की बहुत आभारी हैं।

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