Crude Oil 100 डॉलर के करीब पहुंचा, भारत का तेल आयात बिल और महंगाई बढ़ने की आशंका

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 08, 2026

नयी दिल्ली, आठ सितंबर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत के तेल आयात बिल, रुपये और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव दो प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 99 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) करीब तीन प्रतिशत बढ़कर 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक एवं उपभोक्ता देश है तथा अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है।

पीपीएसी के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल के आयात की औसत कीमत सितंबर में औसतन 100.75 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो अगस्त में 90.19 डॉलर और जुलाई में 82.04 डॉलर प्रति बैरल थी। सात सितंबर को इसकी कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही। रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कॉरपोरेट रेटिंग्स के सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ट ने कहा, ‘‘ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाली सीमित कच्चे तेल की आपूर्ति के सामने चुनौती पैदा हुई है।

ईरान की ओर से जलडमरूमध्य से आगे नया प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र बनाने की धमकी से अतिरिक्त ऊर्जा आपूर्ति भी जोखिम में पड़ सकती है।’’ उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के दाम में हाल की तेजी से वाहन ईंधन बेचने वाली कंपनियों का मार्जिन नकारात्मक हो सकता है और घरेलू एलपीजी पर लागत से कम कीमत पर बिक्री का मौजूदा करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर का बोझ बढ़ सकता है। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तीन महीने से अधिक समय से स्थिर हैं। इनके दाम आखिरी बार 25 मई को बढ़े थे।

कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के मार्जिन पर भी दबाव बढ़ सकता है। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों में पिछली बढ़ोतरी का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाने के कारण पहले ही नुकसान से जूझ रही हैं। इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की वैश्विक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही धीमी हो गई है।

इस मार्ग से अमूमन वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति घटकर करीब 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई है, जो पहले करीब 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन थी। ऊर्जा शोध एवं परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी के मुताबिक, पश्चिम एशिया संघर्ष साल के अंत तक जारी रहने पर अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का प्रसंस्करण करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन घट सकता है, जिसमें सबसे अधिक कमी एशिया में होगी।

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