By संतोष उत्सुक | Apr 04, 2022
कम उम्र में सफलता में डूबी हीरोइन, टॉक शो में मिनी टाइट लाल ड्रैस पहन इठलाती हुई आकर सोफे पर बैठी तो सोफे की गलती से ड्रैस नीचे खिसक ली। दांत दिखाती, मन से खुश, ‘ओह सौरी’ बोलते हुए ड्रैस ठीक की। टीआरपी हेतू कार्यक्रम संचालक ने असहजता मनवाने की कोशिश की मगर सफलता मानी नहीं। उन्होंने आग्रह किया कि वह हिंदी में ही बात करेंगी। जितने सवाल हुए उनके जवाबों का सारांश यूं रहा। अपने बारे भावनात्मक होते हुए बताया कि वह छोटे से पहाड़ी गांव से हैं। खामोश तबीयत, काम में व्यस्त रहने वाली आम लड़की है। कढ़ीचावल पसंद हैं। मातापिता पारम्परिक, सुसंस्कृत, मेहनती और अनुशासन प्रिय हैं। अनुशासित परिवार की संस्कारवान बेटी हूं इसलिए व्यव्सायिक लाइफ व व्यक्तिगत लाइफ मिक्स नहीं करती।
ग्लैमरस होने और दिखने बारे उन्होंने समझाया, अब यह ज़िंदगी की आक्सीजन है। पहले सौम्यता, शालीनता, अनुशासन और संस्कार ही ज़िंदगी का ग्लैमर होते थे। ग्लैमरस पर्सनेलिटी द्वारा किए गए काम सफलता भरी इमेज बनाते है। क्रिकेट, चियर लीडर्ज़ के कारण ही देखने लायक बना। माहौल के मुताबिक खुद को प्रेजेंटेबल बनाना भी ग्लैमरस होना है। ग्लैमरस हो जाएं तो हम किसी भी फील्ड में सफल हो सकते हैं। ग्लैमर टेलेंट में वैल्यू एड करता है। समाज में रौनक लाने के लिए सबको ग्लैमरस हो जाना चाहिए। देश में बढ़ रही बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, समानता, जात पात बारे विचार प्रकट करने के लिए कहा तो संजीदगी से जवाब दिया, हम कभी ग़लत बयान नहीं देते। हमें अपने संस्कारों व देश का पूरा ख्याल है। उचित जवाब देकर, थोड़ा हिलने पर उनकी ड्रैस सातवीं बार खतरे के निशान से नीचे आ गई मगर उन्होंने अनुभवी की तरह ठीक कर लिया।
- संतोष उत्सुक