Dara Singh Birth Anniversary: जीवन में एक भी कुश्ती नहीं हारे थे दारा सिंह, अभिनय और लेखन में भी आजमाया हाथ

By अनन्या मिश्रा | Nov 19, 2025

अपने जमाने के विश्व प्रसिद्ध फ्रीस्टाइल पहलवान दारा सिंह का 19 नवंबर को जन्म हुआ था। दारा सिंह अपने जमाने के बेहतरीन रेसलर ही नहीं बल्कि एक शानदार अभिनेता भी थे। हिंदी सिनेमा में एंट्री मारने के बाद दारा सिंह ने कई फिल्मों को प्रोड्यूस किया था। दारा सिंह ने 500 मुकाबले लड़े और हर किसी में जीत हासिल की। दारा सिंह एक भी जंग नहीं हारे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर दारा सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

पंजाब के अमृतसर स्थित धरमूचक गांव में 19 नवंबर 1928 को दारा सिंह का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम सूरत सिंह रंधावा और मां का नाम बलवंत कौर था। दारा सिंह को बचपन से ही पहलवानी का शौक था। इसलिए जब भी उनको मौका मिला, वह अपने प्रतिद्वंद्वी को धूल चटा देते थे।

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कुश्ती विजय यात्रा

साल 1947 में जब देश आजाद हुआ, तो दारा सिंह ने सिंगापुर पहुंचकर मलेशिया के पहलवान को चारों खाने चित्त कर दिया था। उन्होंने सिंगापुर में ही हरमान सिंह से कुश्ती की ट्रेनिंग ली थी। साल 1948-49 के आसपास दारा सिंह ने कुआलालंपुर में तरलोक सिंह को हराया था। दारा सिंह को इस जीत के साथ 'चैम्पियन ऑफ मलेशिया' का खिताब दिया गया। फिर करीब 5 सालों बाद वह दुनियाभर के पहलवानों को धूल चटाते रहे। वहीं साल 1954 में वह कुश्ती चैम्पियन भारतीय कुश्ती के चैंपियन बने। उनका कुश्ती में इतना दबदबा था कि उनके सामने अखाड़े में विश्व चैंपियन किंग कॉन्ग भी नहीं टिक पाए थे।


विश्व विजेता किंग कॉन्ग को शिकस्त देने के बाद दारा सिंह ने न्यूजीलैंड और कनाडा के पहलवानों ने खुली चुनौती दी। लेकिन दारा सिंह ने  न्यूजीलैंड के जॉन डिसिल्वा को और कनाडा के चैंपियन जॉर्ज गोडियां को भी पटखनी दे दी। दारा सिंह ने कहा था कि जब तक वह 'विश्व चैंपियनशिप' न जीत लें, तब तक कुश्ती लड़ते रहेंगे। 29 मई 1968 को दारा सिंह ने अमेरिका के विश्व चैंपियन लाऊ थेज को हराया और फ्रीस्टाइल कुश्ती के बादशाह बन गए।


अपराजेय पहलवान थे दारा सिंह

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दारा सिंह ने 500 मुकाबले लड़े और हर किसी में जीत हासिल की। दारा सिंह एक भी जंग नहीं हारे और साल 1983 में उन्होंने आखिरी मुकाबला लड़ा और फिर पेशेवर कुश्ती को अलविदा कह दिया। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने दारा सिंह को अपराजेय पहलवान के खिताब से नवाजा था।


फिल्म और लेखन

पहलवानी करते हुए दारा सिंह ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। साल 1952 में उन्होंने फिल्म 'संगदिल' से अभिनय की शुरूआत की थी। कुछ दिन दारा सिंह ने फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार निभाए थे। साल 1962 में बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म 'किंग कॉन्ग' में दारा सिंह ने मुख्य अभिनेता के तौर पर काम किया था। इसके बाद दारा सिंह ने एक्ट्रेस मुमताज के साल 16 फिल्मों में काम किया था। दारा सिंह ने एक्टिंग के अलावा लेखन और निर्देशन में भी हाथ आजमाया था।


बता दें कि दारा सिंह ने 7 फिल्मों की कहानी लिखी है। इसके अलावा वह रामानंद सागर की 'रामायण' में हनुमान के रोल से अमर हो गए। दारा सिंह को आज भी इस किरदार के लिए याद किया जाता है। फिल्मों के साथ-साथ दारा सिंह ने राजनीति में भी कदम रखा। साल 1998 में दारा सिंह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। फिर साल 2003 में दारा सिंह राज्यसभा सांसद बने।


मृत्यु

वहीं 12 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से दारा सिंह इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए थे।

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