Supreme Court on President: राष्ट्रपति के लिए समयसीमा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे सकती है केंद्र सरकार

By अभिनय आकाश | Apr 14, 2025

राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समयसीमा तय करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकारचुनौती दे सकती है। तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल मामले में 8 अप्रैल को आए फैसले ने एक तरह से राष्ट्रपति की शक्तियों को भी सीमित कर दिया। सूत्रों के अनुसार केंद्र एक समीक्षा याचिका दायर करने की योजना बना रहा है। इस फ़ैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपालों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय कर दी है। यह एक तरह से राष्ट्रपति की "पूर्ण वीटो" की शक्ति को छीन लेता है। तमिलनाडु मामले में फ़ैसला न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने सुनाया। 

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हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पुनर्विचार याचिका किस बात को चुनौती देगी। यह नहीं बताया गया कि केंद्र सरकार तय की गई समयसीमा की समीक्षा की मांग करेगी या राष्ट्रपति के पूर्ण वीटो को खत्म करने की। यह इस आधार पर भी पुनर्विचार की मांग कर सकती है कि केंद्र को मामले में अपनी दलीलें रखने का मौका नहीं मिला। यह तब स्पष्ट होगा जब सरकार सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। पुनर्विचार याचिका पर सरकार के शीर्ष स्तर पर चर्चा चल रही है और पूरी संभावना है कि इसे सर्वोच्च न्यायालय में दायर किया जाएगा। भारत के अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले में राष्ट्रपति की बात सुनी जानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि क्या केंद्र पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। 

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द हिंदू ने एक अनाम वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका तैयार की जा रही है। मामले में बहस के दौरान केंद्र के तर्कों को पर्याप्त रूप से दृढ़ता से नहीं दर्शाया गया। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि गृह मंत्रालय विधेयकों के संदर्भों को संसाधित करने और राज्यों को राष्ट्रपति के निर्णयों को संप्रेषित करने वाली नोडल एजेंसी - ने कानून के बिंदुओं में कुछ "कमियों" का हवाला दिया है क्योंकि यह मामला सीधे उसके अधिकार क्षेत्र से संबंधित है।

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