By नीरज कुमार दुबे | Jan 30, 2025
महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या पर्व पर मची भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मृत्यु होना बहुत दुखद खबर है। लेकिन इस हादसे के बावजूद आठ करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने उसी दिन स्नान किया और सकुशल वापस घर गये यह उत्तर प्रदेश प्रशासन की एक बड़ी उपलब्धि भी है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की आबादी देखें तो वह लगभग 60 लाख के आसपास है। कुम्भ मेले में अब तक आ चुके श्रद्धालुओं का आंकड़ा देखें तो वह 30 करोड़ के पास पहुँचने वाला है। योगी सरकार का आकलन है कि 26 फरवरी तक चलने वाले धरती के इस सबसे बड़े मेले में 45 करोड़ के आसपास लोग आयेंगे। ऐसे में आप कल्पना करके देखिये कि इतनी बड़ी भीड़ को संभालने और उनके लिए तमाम तरह की व्यवस्थाएं करने के लिए प्रशासन ने कितने समय से कितने प्रयास किये होंगे।
आपने देखा होगा कि भगदड़ की घटना की खबर मिलते ही विपक्ष के कई नेता इतनी तेजी से बयान जारी करने लग गये थे जैसे कि वह पहले से टाइप करके रखा गया था और किसी हादसे की प्रतीक्षा की जा रही थी ताकि योगी सरकार को घेरा जा सके। कुछ मीडिया संस्थानों ने भी सनसनी फैलाने में देरी नहीं लगाई और अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझते हुए सिर्फ अव्यवस्था संबंधी खबरें चलाईं। जबकि सच्चाई यह थी कि घटना के कुछ ही मिनटों के भीतर हालात पर काबू पाया जा चुका था और इसी का परिणाम था कि पूरे दिन स्नान सुचारू रूप से चला और आज भी करोड़ों लोग अब तक डुबकी लगा चुके हैं और सरकार के इंतजामों की तारीफ कर रहे हैं।
कुछ लोगों ने सोशल मीडिया और मीडिया के मंचों से सवाल उठाया कि जब यूपी सरकार सुबह-शाम श्रद्धालुओं की संख्या के आंकड़े जारी कर रही है तो उसे सुबह मारे गये श्रद्धालुओं की संख्या बताने में सोलह घंटे क्यों लग गये? ऐसे लोगों को समझना होगा कि महाकुंभ मेले में आ रहे श्रद्धालुओं की गिनती के लिए एआई कैमरों सहित तमाम तरह की तकनीक की मदद ली जा रही है और भगदड़ में मारे गये लोगों की संख्या बताने में समय इसलिए लगा होगा क्योंकि मौत का आंकड़ा किसी की मृत्यु के बाद ही बताया जाता है। यदि आपने घटना के बाद के वीडियो देखें हों तो उसमें साफ प्रदर्शित हो रहा है कि घायल अवस्था में कई लोगों को एम्बुलेंसे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर तेजी से अस्पताल ले जा रही हैं। यूपी सरकार सुबह से ही कह रही थी कि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हो सकता है कि किसी की इलाज के दौरान मृत्यु हुई हो या किसी की अस्पताल लाये जाने के दौरान ही मृत्यु हो गयी हो। यह भी सर्वविदित है कि जब तक डॉक्टर किसी को मृत घोषित नहीं कर देते और उसकी पहचान तथा अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं तब तक आंकड़े सामने नहीं आते। यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक हादसा जो हो चुका था उसके बारे में उस समय ज्यादा जानकारी देने से यदि हालात बिगड़ जाते तो और भी हादसे हो सकते थे क्योंकि करोड़ों की संख्या में लोग एक जगह पर मौजूद थे।
30 श्रद्धालुओं की मौत होना हृदय विदारक है और मृतकों के परिजनों की दशा समझी जा सकती है लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि अब तक 30 करोड़ लोग सकुशल स्नान करके जा चुके हैं। देखा जाये तो कुंभ मेले की बड़ी तस्वीर भगदड़ की एक घटना की नहीं बल्कि यहां करोड़ों की संख्या में उत्साह के साथ स्नान कर बिना किसी नुकसान के जा चुके श्रद्धालुओं की है। यहां हमें यह भी समझना होगा कि भगदड़ या भूकंप या दुर्घटनाओं या हत्याओं से होने वाली मौतों पर प्रतिक्रिया करते समय या उससे संबंधित समाचार दिखाते समय हमें संयम बरतना चाहिए।
बहरहाल, निश्चित रूप से कुंभ भगदड़ बड़ी खबर है। लेकिन भारत जैसे भीड़भाड़ वाले देश में भगदड़ से होने वाली मौतें विभिन्न बीमारियों और कारणों से होने वाली कुल मौतों का केवल एक अंश मात्र हैं। अल्जाइमर दुनिया भर में मौत का सातवां प्रमुख कारण है। लेकिन इस बीमारी से होने वाली मौतें कभी भी पेज-1 की खबर नहीं बनती ना ही कोई मीडिया चैनल इस पर प्राइम टाइम में या अन्य समय पर खबर दिखाता है। भारत में सड़क दुर्घटनाओं और तमाम तरह की बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन वह कभी बड़ी खबर इसलिए नहीं बनती क्योंकि इसमें किसी को राजनीति करने का मौका नहीं मिलता।
-नीरज कुमार दुबे