By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 06, 2026
नयी दिल्ली, छह अगस्त दिल्ली की एक अदालत ने चाकू गोद कर पत्नी की हत्या के प्रयास और दहेज के लिये क्रूरता करने के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत पाहवा, 2018 में गोकलपुरी पुलिस थाने में हत्या की कोशिश और पति द्वारा क्रूरता के आरोपों के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। अदालत ने तीन अगस्त के एक आदेश में कहा, “यह अदालत पक्के तौर पर मानती है कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों में से कोई भी आरोपी का दोष बिना किसी शक के साबित नहीं कर सका।
अदालत ने हालांकि गौर किया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया, क्योंकि ज्यादातर अहम गवाह या तो मुकर गए या फिर आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं दे पाए। अभियोजन पक्ष के लिए एक बड़ा झटका पीड़ित की बहन और कथित चश्मदीद गवाह की गवाही थी। न्यायाधीश ने गौर किया कि सुनवाई के दौरान बहन की मौत हो गई, इससे पहले कि उनसे जिरह पूरी हो पाती; इस वजह से उनकी गवाही का सबूत के तौर पर कोई महत्व नहीं रह गया।
पीड़िता ने खुद भी अभियोजन पक्ष की बात का समर्थन नहीं किया। अपने बयान में पत्नी ने कहा कि एक आदमी, जिसका चेहरा मफलर से ढका हुआ था, उसके कमरे में घुसा और उस पर हमला किया; उसने अपने पति को हमलावर के तौर पर नहीं पहचाना। अदालत ने आगे कहा कि परिवार के अन्य सदस्यों को या तो घटना के बारे में कोई सीधी जानकारी नहीं थी या उनके बयान सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थे।