By नीरज कुमार दुबे | Sep 22, 2026
पाकिस्तान में 27 सितंबर को होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि इस्लामाबाद के अस्पतालों को संभावित बड़े पैमाने पर घायलों के आने की आशंका के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों को कथित तौर पर संभावित “मानवीय संकट” और “बड़े पैमाने पर जनहानि वाली आपात स्थिति” के लिए तैयार रहने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि पहले से निर्धारित ऑपरेशनों को अनिश्चितकाल के लिए टालने, शल्य चिकित्सा विभागों को संभावित मरीजों की अचानक बढ़ती संख्या के लिए तैयार रखने और चिकित्सा तथा सहायक कर्मचारियों को उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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हम आपको बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ द्वारा 27 सितंबर को प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद मार्च से ठीक पहले सामने आया है। पीटीआई इस आंदोलन के जरिए जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रही है। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई केवल इमरान की पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है। इमरान खान की तीनों बहनों अलीमा खान, डॉ. उज़मा खान और नोरीन नियाज़ी को हिरासत में ले लिया गया है। अलीमा खान को 30 दिन के लिए हिरासत में रखने का आदेश लाहौर के उप-आयुक्त कार्यालय से जारी हुआ, जबकि उज़मा और नोरीन के खिलाफ भी सार्वजनिक व्यवस्था कानून के तहत 30 दिन की हिरासत के आदेश जारी किए गए।
रिपोर्टों के मुताबिक 24 घंटे के भीतर इमरान खान परिवार के आठ सदस्य हिरासत में लिए गए थे। इनमें शामिल बच्चों को कुछ घंटों बाद छोड़ दिया गया, जबकि इमरान की तीनों बहनें हिरासत में रहीं। पीटीआई ने इसे राजनीतिक दमन और अधिकारों का उल्लंघन बताया है, जबकि प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी आधारों का हवाला दिया है। बहनों की हिरासत को लाहौर उच्च न्यायालय में चुनौती भी दी गई है।
उधर, पीटीआई का दावा है कि उसके नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं पर देशभर में कार्रवाई हो रही है और पार्टी कार्यालयों पर छापे मारे जा रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता बैरिस्टर गोहर अली खान ने 27 सितंबर का मार्च जारी रखने की बात कही है। वहीं गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी सरकार की ओर से प्रदर्शन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।
विडंबना देखिए कि जिस समय पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में संभावित बड़े पैमाने पर जनहानि के लिए अस्पतालों को तैयार किया जा रहा है, उसी समय प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका का गुणगान करने की तैयारी कर रहे हैं। शहबाज शरीफ 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे और उनके कार्यक्रम में क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा, संवाद और कूटनीति पर पाकिस्तान का पक्ष रखने की बात कही गई है। इसी दौरान शहबाज शरीफ की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात भी प्रस्तावित है। लेकिन पाकिस्तान की तस्वीर अपने घर में बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। ऐसे में शहबाज सरकार के सामने एक विरोधाभास खड़ा होता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह ईरान संकट में संवाद और तनाव कम करने की पैरवी कर रही है, जबकि उसके अपने देश में विपक्ष के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर तनाव इस स्तर तक पहुंच गया है कि चिकित्सा व्यवस्था को संभावित जनहानि के लिए तैयार किया जा रहा है।
इस बीच, इमरान खान की जेल में स्वास्थ्य स्थिति भी राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। उनके निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान को कई सप्ताह से उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। अगस्त में पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने इमरान खान को चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने तथा उनके निजी चिकित्सक से जांच कराने का आदेश दिया था; बाद में उन्हें परीक्षण के लिए पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया और फिर अदियाला जेल वापस भेज दिया गया।
अब सवाल केवल 27 सितंबर के प्रदर्शन का नहीं है। अस्पतालों में संभावित बड़े पैमाने की आपात स्थिति की तैयारी, विपक्षी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं की धरपकड़, इमरान खान की बहनों की हिरासत और खुद इमरान खान की चिकित्सा को लेकर उठते सवाल, ये सभी घटनाएं पाकिस्तान के राजनीतिक संकट की गंभीरता को एक साथ सामने ला रही हैं। अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि 27 सितंबर पाकिस्तान में केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह जाता है या पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक संघर्ष को और ज्यादा टकराव की दिशा में ले जाता है।