By अंकित सिंह | Oct 21, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उनकी उम्र को लेकर एक टिप्पणी की। इन नेताओं पर जंतर-मंतर पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश करने का आरोप है। जब दोनों याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी ने कोर्ट को बताया कि दास 27 साल के हैं और रंका 32 साल के, तो कोर्ट ने टिप्पणी की, "फिर तो आप 'जेन Z' (Gen Z) नहीं हैं। 'जेन Z' क्या है?"
सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में 'डीनोटिफाई' (अधिसूचना से बाहर) किए जाने के बावजूद वहां जाने के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि बैरिकेड्स किसी मकसद से लगाए जाते हैं। जब आप जाकर बैरिकेड तोड़ते हैं, तो वहां और लोगों के आने की संभावना बन जाती है — ऐसे लोग जो शायद आपके नियंत्रण में न हों। फ्रांस में छात्रों के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए, हाई कोर्ट ने कहा, “हम अपने देश के बाहर भी ऐसा ही कुछ देख रहे हैं। जो एक छात्र विरोध के रूप में शुरू हुआ था, वह अब आगजनी और लूटपाट में बदल गया है... इसीलिए आपको पुलिस की अनुमति की जरूरत होती है। इसका मकसद सिर्फ आपको रोकना नहीं है, बल्कि दूसरों को आपके साथ जुड़ने और आपका नाम खराब करने से रोकना भी है।”
अदालत ने यह सवाल उठाया कि क्या उस जगह पर विरोध प्रदर्शन करना, जहाँ से अनुमति वापस ले ली गई थी, इतना गंभीर मामला था कि इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जाए। अदालत ने कहा कि इस कार्रवाई की वैधता एक अलग मुद्दा है, जिस पर वह विचार करेगी। अदालत ने कहा, "आप वहाँ गए और बैरिकेड तोड़ दिया। इस मुद्दे को हम देखेंगे।" सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने CJP नेताओं से उनकी उम्र भी पूछी। दास 26 साल के हैं और रंका 31 साल के। अदालत ने चुटकी लेते हुए कहा, "तो फिर आप 'जेन Z' (Gen Z) नहीं हैं। 'मिलेनियल्स' (millennials) किस उम्र के लोगों को कहा जाता है?" अदालत ने यह भी गौर किया कि हालाँकि यह विरोध प्रदर्शन शुरुआत में एक छात्र आंदोलन था, लेकिन बाद में इसका मकसद बदल गया।