कॉजपा नेताओं के समर्थन पर Naveen Patnaik पर भड़की Odisha BJP, लगाए गंभीर आरोप

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ओडिशा में सत्तारूढ़ भाजपा ने कॉकरोच जनता पार्टी के दो नेताओं की रिहाई की मांग करने पर पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजद प्रमुख राजनीतिक लाभ के लिए देश में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने और सत्ता परिवर्तन की कोशिशों का समर्थन कर रहे हैं।

ओडिशा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के दो नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करने को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक पर राजनीतिक लाभ के लिए देश में ‘‘बांग्लादेश जैसी स्थिति’’ पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। भाजपा ने मंगलवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पटनायक ‘‘सत्ता परिवर्तन’’ की कोशिशों का समर्थन कर रहे हैं। पटनायक ने कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की मांग की थी।

दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर की ओर मार्च निकालने के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद से न्यायिक हिरासत में रखा गया है। नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद कॉजपा के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले पटनायक ने कहा था कि प्रतिबंधित क्षेत्र में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए इतनी लंबी अवधि तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। इस पर भाजपा ने कहा, ‘‘पटनायक अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं।’’ पार्टी ने पटनायक पर उन गतिविधियों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया, जिन्हें उसने ‘‘सत्ता परिवर्तन’’ की कोशिश बताया।

भाजपा ने कहा, ‘‘आप (पटनायक) 24 साल तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे और सत्ता से बाहर हुए अभी बमुश्किल 24 महीने हुए हैं, लेकिन आपने सत्ता परिवर्तन जैसी गतिविधियां शुरू कर दी हैं? अराजक तत्वों और भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल विदेशी धन से पोषित ताकतों का समर्थन करना, जो बांग्लादेश जैसी हिंसक सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रही हैं, आपके इतिहास को देखते हुए हैरान करने वाला नहीं है। आपने राज्य में हजारों अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बसने दिया।

आपने न केवल उन्हें मतदाता बनने दिया, बल्कि अब आप एसआईआर प्रक्रिया का भी विरोध कर रहे हैं।’’ भाजपा ने कहा कि ओडिशा के लोग हमेशा से शांतिप्रिय रहे हैं और भारत की संप्रभुता का सम्मान करते आए हैं। पार्टी ने कहा, ‘‘हमारे देश की संप्रभुता अस्थायी राजनीतिक प्रचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दूसरों के इशारे पर चलना बंद करें।’’ भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने पटनायक की आलोचना करते हुए कहा कि बीजद प्रमुख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरह प्रचार पाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

बिस्वाल ने कहा, ‘‘भारत एक लोकतंत्र है, भीड़तंत्र नहीं! कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति व्यवस्था बाधित होने की आशंका के आधार पर एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नवीन बाबू उच्चतम न्यायालय की ओर राहुल गांधी के मार्च के तरीके को अपनाते हुए न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। किसी पूर्व मुख्यमंत्री से इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जाती।

हम भारत में फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम और इटली जैसी भीड़तंत्र की स्थिति और सड़कों पर अशांति फैलने का इंतजार नहीं कर सकते।’’ भाजपा की ये टिप्पणियां पटनायक की उस पोस्ट के बाद आईं, जिसमें उन्होंने दास और रांका की तत्काल रिहाई की मांग की थी। पटनायक ने ‘एक्स’ पर लिखा था, ‘‘जय हिंद। #आशुतोष रांका और #सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तत्काल समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

प्रतिबंधित क्षेत्र में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए, इतनी लंबी अवधि तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। न्यायपालिका और कार्यपालिका को यह सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए कि देश के युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों से विश्वास न उठे।’’ कॉजपा प्रमुख अभिजीत दीपके ने दास और रांका को समर्थन देने के लिए बीजद प्रमुख का आभार जताया। इस बीच, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कॉजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज दो मामलों की जांच करेगी।

दूसरा मामला, जो कथित तौर पर दास और रांका के जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने से जुड़ा है, सोमवार को अपराध शाखा को सौंप दिया गया था। पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को दास, रांका, अजिंक्य शिंदे और कॉजपा के 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर निजी परिसर से होकर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के बाद जंतर-मंतर पहुंचे थे। इससे पहले जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की अधिसूचित सूची से हटाया जा चुका है।

वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें रोकने की कोशिश की। सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया और दो प्राथमिकी दर्ज की गईं। शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बंधपत्रों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के मामले में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर को दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई।

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