By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 23, 2026
दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस आरोपी को दी गई जमानत रद्द कर दी है जो इस महीने की शुरुआत में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाए जाने के अभियान के दौरान पथराव करने वाली भीड़ में कथित तौर पर शामिल था।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने मामले को पुनर्विचार के लिए अधीनस्थ अदालत में वापस भेजते हुए कहा कि हालांकि अदालत किसी व्यक्ति को दी गई राहत में हस्तक्षेप करने में बेहद सतर्क रहती है लेकिन यह एक ‘‘असाधारण’’ मामला है जिसमें रेहड़ी-पटरी लगाने वाले उबैदुल्ला को एक ‘‘अस्पष्ट और तर्कहीन’’ आदेश के माध्यम से जमानत दी गई थी।
अधीनस्थ अदालत ने उबैदुल्ला को 20 जनवरी को जमानत दी थी। न्यायमूर्ति जालान ने कहा कि जमानत आदेश में अभियोजन पक्ष के तर्कों पर समुचित विचार नहीं किया गया और जमानत के निर्णय को नियंत्रित करने वाले कारकों का प्रथम दृष्ट्या या संक्षिप्त विश्लेषण भी नहीं किया गया।
अदालत ने 21 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा कि पर्याप्त कारणों के अभाव में अधीनस्थ अदालत का आदेश रद्द किया जाता है और मामले को सत्र अदालत को वापस भेजा जाता है। यह मामला छह और सात जनवरी की दरम्यानी रात को रामलीला मैदान क्षेत्र में मस्जिद के पास अतिक्रमण-रोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है।
पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई कि तुर्कमान गेट के सामने वाली मस्जिद को ध्वस्त किया जा रहा है जिससे लोग मौके पर जमा हो गए। उसने कहा कि करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और दिल्ली नगर निगम के कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं, जिससे क्षेत्र के थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।